UP : लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) अस्पताल से शुक्रवार सुबह एक विचाराधीन कैदी पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। इस घटना के बाद पुलिस और जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया है। आरोपी कैदी का नाम हैदर अली है, जो रेप
UP : लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) अस्पताल से शुक्रवार सुबह एक विचाराधीन कैदी पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। इस घटना के बाद पुलिस और जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया है। आरोपी कैदी का नाम हैदर अली है, जो रेप और धोखाधड़ी जैसे गंभीर मामलों में आरोपी था और अस्पताल के गांधी वार्ड में अपना इलाज करा रहा था।
कौन है फरार कैदी हैदर अली और क्या हैं उस पर आरोप
फरार कैदी हैदर अली की उम्र 39 वर्ष है और वह ओडिशा के बालासोर जिले के चांदीपुर का रहने वाला है। उस पर एक महिला को फर्जी सैन्य अधिकारी बताकर यौन शोषण करने और शादी का झांसा देकर करीब साढ़े चार लाख रुपये हड़पने का आरोप है। पुलिस ने उसे 6 या 7 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया था। तबीयत खराब होने के कारण उसे 4 जून 2026 को KGMU में भर्ती कराया गया था।
सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों पर क्या कार्रवाई हुई
कैदी के गायब होने के बाद उसकी सुरक्षा में तैनात हेड कांस्टेबल दिनेश कुमार और बंदी रक्षक धर्मेंद्र सिंह के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि इनकर्मियों ने कैदी के भागने की खबर तुरंत बड़े अधिकारियों को नहीं दी और कई घंटों तक खुद ही उसकी तलाश करते रहे। जेलर ऋत्विक प्रियदर्शी ने इस मामले में चौक कोतवाली में FIR दर्ज कराई है।
अब पुलिस की क्या है तैयारी
एडीसीपी पश्चिम धनंजय कुशवाहा ने बताया कि फरार आरोपी हैदर अली की तलाश के लिए पुलिस की कई टीमें गठित की गई हैं। शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे जब बंदी रक्षक नागेश चंद्र सरोज ने जांच की, तब बेड खाली मिला और कैदी के गायब होने का पता चला। पुलिस अब शहर के अलग-अलग इलाकों में उसकी तलाश कर रही है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
कैदी हैदर अली KGMU अस्पताल में क्यों भर्ती था
हैदर अली को उल्टी और रक्तस्राव की शिकायत थी। पहले उसे जेल अस्पताल और फिर बलरामपुर अस्पताल में रखा गया था, लेकिन हालत बिगड़ने पर 4 जून 2026 को उसे KGMU के गांधी वार्ड में शिफ्ट किया गया था।
पुलिसकर्मियों पर मामला क्यों दर्ज हुआ
सुरक्षा में तैनात हेड कांस्टेबल दिनेश कुमार और बंदी रक्षक धर्मेंद्र सिंह पर लापरवाही का आरोप है क्योंकि उन्होंने कैदी के फरार होने की सूचना समय पर उच्चाधिकारियों को नहीं दी।