UP : लखनऊ के मलिहाबाद इलाके में स्थित कांसमंडी किले को लेकर पासी और मुस्लिम समाज के बीच विवाद बढ़ गया है। पासी समाज का कहना है कि यह जगह महाराजा राजपासी राजा कंस का ऐतिहासिक किला और शिव मंदिर है, जिस पर कब्जा किया गया है
UP : लखनऊ के मलिहाबाद इलाके में स्थित कांसमंडी किले को लेकर पासी और मुस्लिम समाज के बीच विवाद बढ़ गया है। पासी समाज का कहना है कि यह जगह महाराजा राजपासी राजा कंस का ऐतिहासिक किला और शिव मंदिर है, जिस पर कब्जा किया गया है। दूसरी तरफ मुस्लिम पक्ष इसे वक्फ रिकॉर्ड में मस्जिद और कब्रिस्तान बता रहा है। इस तनाव को देखते हुए प्रशासन ने इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है।
पासी समाज और मुस्लिम पक्ष के क्या हैं दावे
पासी समाज के नेताओं का कहना है कि यह स्थल 10वीं से 11वीं शताब्दी के बीच महाराजा कंस का किला था और यहाँ शिव मंदिर में पूजा होती थी। राष्ट्रीय अध्यक्ष लाखन पासी ने पुरातत्व विभाग से इसकी जांच कराने की मांग की है। वहीं, मुस्लिम पक्ष और मौलाना सूफियान का कहना है कि सरकारी दस्तावेजों में यह जगह मकबरा और मस्जिद के रूप में दर्ज है और यहाँ सालों से नमाज पढ़ी जा रही है।
प्रशासन ने तनाव रोकने के लिए क्या कदम उठाए
21 और 22 मई 2026 को विवाद बढ़ने के बाद पुलिस ने मलिहाबाद में कड़ी घेराबंदी कर दी। पासी समाज के नेता सूरज पासवान और करीब 20 कार्यकर्ताओं को हाउस अरेस्ट किया गया ताकि स्थिति न बिगड़े। पुलिस ने शुक्रवार की नमाज को लेकर पासी समाज की घोषणा के बाद विवादित जगह पर किसी भी व्यक्ति के जाने पर रोक लगा दी है। एसडीएम मलिहाबाद ने कहा है कि ज्ञापन मिलने के बाद जांच की जाएगी और फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
कौन थे महाराजा कंस और क्या कहता है इतिहास
इतिहास के अनुसार महाराजा कंस पासी अवध क्षेत्र के एक प्रतापी राजा थे, जिन्होंने 980 से 1031 ईस्वी तक शासन किया। उनका साम्राज्य मलिहाबाद, काकोरी, उन्नाव, संडीला और हरदोई तक फैला था। लखनऊ गजेटियर में भी 11वीं शताब्दी के अंत में काकोरी और आसपास के इलाकों में उनके प्रभाव का जिक्र मिलता है। अंग्रेजी गजेटियर में यह भी दर्ज है कि राजा कंस ने सालार मसूद के दो सेनापतियों, सैय्यद हातिम और खातिम को युद्ध में मार गिराया था।
Frequently Asked Questions (FAQs)
कांसमंडी किले को लेकर विवाद क्या है
पासी समाज का दावा है कि यह महाराजा कंस का ऐतिहासिक किला और शिव मंदिर है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे वक्फ रिकॉर्ड के आधार पर मस्जिद और कब्रिस्तान बता रहा है।
प्रशासन ने इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई की है
पुलिस ने इलाके में भारी बल तैनात किया है, कुछ पासी समाज के नेताओं को हाउस अरेस्ट किया गया है और एसडीएम ने जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करने की बात कही है।