Lucknow-Kanpur एक्सप्रेस-वे की सड़क के नीचे मिली नमी, IIT खड़गपुर की टीम ने की जांच

UP: करीब 4,200 करोड़ रुपये की लागत से बने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे में बड़ी खामियां सामने आई हैं। उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सड़क धंसने और दरारें आने की शिकायतों के बाद अब IIT खड़गपुर की टीम ने इसकी जांच शुरू कर दी है।

UP: करीब 4,200 करोड़ रुपये की लागत से बने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे में बड़ी खामियां सामने आई हैं। उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सड़क धंसने और दरारें आने की शिकायतों के बाद अब IIT खड़गपुर की टीम ने इसकी जांच शुरू कर दी है। शुक्रवार को करीब चार घंटे तक चले निरीक्षण में ग्रीनफील्ड एरिया में सड़क के कई फुट नीचे तक नमी पाई गई है।

यह एक्सप्रेस-वे 13 जुलाई 2026 को शुरू हुआ था, लेकिन उद्घाटन के महज 20 दिनों के भीतर ही कई जगहों पर डामर उखड़ने और सड़क धंसने की खबरें आईं। स्थिति इतनी गंभीर थी कि NHAI ने टोल वसूली को तुरंत रोक दिया और मरम्मत के आदेश दिए। जांच के लिए प्रोफेसर के.एस. रेड्डी की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति बनाई गई है, जो सड़क के डिजाइन, निर्माण सामग्री और जल निकासी व्यवस्था की बारीकी से जांच कर रही है।

NHAI ने निर्माण कंपनी PNC इंफ्राटेक को ‘नॉन-परफॉर्मर’ घोषित कर दिया है। लापरवाही के चलते कंपनी के तीन अधिकारियों को हटाकर अगले दो साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है। साथ ही, परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा को भी हटा दिया गया है और पूर्व परियोजना निदेशक सौरभ चौरसिया के खिलाफ आरोप पत्र जारी किया गया है।

जांच टीम ने उन जगहों से मिट्टी और डामर के नमूने लिए हैं जहाँ सड़क धंसने की शिकायतें मिली थीं। इन नमूनों को लैब भेजा गया है। टीम का कहना है कि स्थलीय निरीक्षण और लैब रिपोर्ट के आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसे उच्च अधिकारियों को सौंपा जाएगा। जब तक मरम्मत का काम पूरा नहीं हो जाता, तब तक यह एक्सप्रेस-वे टोल-फ्री रहेगा और टोल का नुकसान निर्माण कंपनी से वसूला जाएगा।