UP : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से एक साल तक सोने के गहने न खरीदने की अपील की है। इस फैसले के विरोध में लखनऊ के सर्राफा व्यापारियों ने 11 मई, 2026 को अपनी दुकानें बंद रखीं और विरोध प्रदर्शन किया। व्यापारियों
UP : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से एक साल तक सोने के गहने न खरीदने की अपील की है। इस फैसले के विरोध में लखनऊ के सर्राफा व्यापारियों ने 11 मई, 2026 को अपनी दुकानें बंद रखीं और विरोध प्रदर्शन किया। व्यापारियों का कहना है कि इस अपील से उनकी रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ेगा और बाजार में आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।
पीएम ने सोना न खरीदने की अपील क्यों की?
प्रधानमंत्री मोदी ने 10 मई, 2026 को यह अपील की थी। इसका मुख्य उद्देश्य विदेशी मुद्रा को बचाना है। मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध और वैश्विक तेल संकट की वजह से पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिसे देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
व्यापारियों ने क्यों जताया विरोध और क्या हैं उनकी मांगें?
लखनऊ महानगर सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष मनीष कुमार वर्मा ने कहा कि इस अपील से हजारों कारीगरों और दुकानदारों के सामने संकट खड़ा हो गया है। व्यापारियों ने आशियाना के पावर हाउस चौराहे पर पोस्टर लेकर प्रदर्शन किया और पीएम से अपना बयान वापस लेने की मांग की। उनका कहना है कि सर्राफा बाजार पहले से ही मंदी के दौर से गुजर रहा है।
बाजार और शेयर मार्केट पर क्या असर पड़ा?
पीएम की अपील के बाद सोने की कीमतों और ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखी गई।
| विवरण |
असर/कीमत |
| सोने का भाव (MCX 24K) |
₹580 गिरा (नया भाव ₹1,51,944) |
| प्रमुख शेयर (Titan, Kalyan आदि) |
5% से 12% तक की गिरावट |
| प्रभावित लोग |
लगभग 1 करोड़ लोगों की रोजी-रोटी का संकट |
इस बीच, व्यापारियों ने तरलता बढ़ाने के लिए ई-गोल्ड इकाइयों और गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम (GMS) के जरिए राहत देने का प्रस्ताव भी रखा है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
लखनऊ के सर्राफा व्यापारियों ने प्रदर्शन क्यों किया?
प्रधानमंत्री मोदी की एक साल तक सोना न खरीदने की अपील के कारण व्यापारियों को अपनी आजीविका और हजारों कारीगरों के रोजगार पर खतरा महसूस हुआ, इसलिए उन्होंने 11 मई को बाजार बंद रखकर विरोध किया।
गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम (GMS) क्या है?
यह एक सरकारी योजना है जिसमें लोग अपने घर के निष्क्रिय सोने को बैंकों में जमा कर सकते हैं। इससे जमा करने वाले को ब्याज मिलता है और सरकार उस सोने का इस्तेमाल उत्पादक कार्यों के लिए कर सकती है।