Lucknow में अमेरिकी नागरिकों को ठगने वाला इंटरनेशनल गैंग पकड़ा गया, छठी-आठवीं पास निकले मास्टरमाइंड

Lucknow: राजधानी के शहीद पथ इलाके में स्थित ओमेक्स आर-2 सोसायटी से पुलिस ने एक अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। यह गैंग अमेरिकी नागरिकों को अपना निशाना बनाता था और उनसे करोड़ों रुपये की ठगी करता था। पुल

Lucknow: राजधानी के शहीद पथ इलाके में स्थित ओमेक्स आर-2 सोसायटी से पुलिस ने एक अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। यह गैंग अमेरिकी नागरिकों को अपना निशाना बनाता था और उनसे करोड़ों रुपये की ठगी करता था। पुलिस की यह कार्रवाई ‘ऑपरेशन साइ-वज्र’ के तहत की गई, जिसमें गिरोह के सात सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है।

इस गिरोह की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इसके मास्टरमाइंड ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं थे। गैंग का सरगना पुनीत कुमार वर्मा केवल छठी पास है और उसका साथी दीपेन चंद्रकांत पटेल आठवीं पास है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह का कोई भी सदस्य 12वीं क्लास से ज्यादा नहीं पढ़ा था। इन लोगों को सिर्फ इसलिए रखा गया था क्योंकि वे फर्राटेदार अंग्रेजी बोल सकते थे और उन्हें बीपीओ (BPO) का अनुभव था। इन कर्मचारियों को महीने का 35,000 रुपये वेतन और रहने-खाने की सुविधा दी जाती थी।

जांच में सामने आया कि इस गैंग ने पिछले आठ महीनों में अमेरिकी नागरिकों से 200 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी की। पुलिस ने एक अमेरिकी महिला ‘डोरिस’ का डेटा बरामद किया है, जिससे करीब 70 लाख रुपये (70,000 USD) ठगे गए थे।

ठगी का तरीका (Modus Operandi)

ठग पहले पीड़ितों के कंप्यूटर में मैलवेयर भेजते थे, जिससे स्क्रीन पर टोल-फ्री नंबर वाले पॉप-अप मैसेज आने लगते थे। जब पीड़ित कॉल करता था, तो आरोपी खुद को माइक्रोसॉफ्ट का तकनीकी विशेषज्ञ बताते थे। इसके बाद कॉल को दूसरे सदस्य के पास भेजा जाता था, जो खुद को अमेरिकी फेडरल ट्रेड कमीशन (FTC) का अधिकारी बताता था और गिरफ्तारी की धमकी देता था। विश्वास जीतने के लिए वे फर्जी कोर्ट ऑर्डर और सरकारी दस्तावेज ईमेल करते थे।

पैसे लेने के लिए ये लोग सीधे बैंक खाते का इस्तेमाल नहीं करते थे। पीड़ितों से अमेज़न और वॉलमार्ट के गिफ्ट कार्ड खरीदने या कूरियर के जरिए नकद और सोना भेजने को कहा जाता था। अमेरिका में बैठे उनके साथी 30% रकम रखते थे और 70% रकम हवाला के जरिए भारत भेजी जाती थी। गुजरात में रहने वाला पुनीत का भाई यश इस हवाला के पैसों को बांटने का काम संभालता था, जिसकी तलाश अब पुलिस कर रही है।

बरामद सामान संख्या/विवरण
लैपटॉप 8
मोबाइल फोन 9
हेडसेट 9
वाई-फाई राउटर 4
अन्य कंप्यूटर माउस, चार्जर, कॉलिंग स्क्रिप्ट, विदेशी डेटा और फर्जी दस्तावेज

डीसीपी क्राइम ब्रांच अनिल यादव ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने इस गिरोह को पकड़ने वाली टीम को 25,000 रुपये के इनाम की घोषणा की है।