Lucknow में अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़, 119 युवा गिरफ्तार, अमेरिकी नागरिकों से की करोड़ों की धोखाधड़ी
Lucknow: लखनऊ के गोमती नगर में पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह के सदस्य अमेरिकी नागरिकों को अपना निशाना बना रहे थे और उनसे करोड़ों रुपये ठग रहे थे। पुलिस ने इस मामले में 1
Lucknow: लखनऊ के गोमती नगर में पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह के सदस्य अमेरिकी नागरिकों को अपना निशाना बना रहे थे और उनसे करोड़ों रुपये ठग रहे थे। पुलिस ने इस मामले में 119 युवाओं को गिरफ्तार किया है, जिनमें आठवीं पास से लेकर बीटेक तक की पढ़ाई करने वाले लोग शामिल हैं।
यह फर्जी कॉल सेंटर गोमती नगर की समिट बिल्डिंग की 11वीं मंजिल पर ‘सोलारिस सॉल्यूशन’ के नाम से चल रहा था। यह गिरोह पिछले 6 से 18 महीनों से सक्रिय था और भारत में रात के समय काम करता था ताकि अमेरिका में दिन के समय लोगों को कॉल किया जा सके। ठग खुद को FBI, US ट्रेजरी और फेडरल ट्रेड कमीशन जैसे अमेरिकी सरकारी अधिकारियों के रूप में पेश करते थे। वे लोगों को मनी लॉन्ड्रिंग और डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर उनसे गिफ्ट कार्ड, क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल वाउचर के जरिए पैसे वसूलते थे।
पुलिस कमिश्नर अमरेंद्र सेंगर ने बताया कि इन युवाओं ने अपनी अंग्रेजी और तकनीकी जानकारी का गलत इस्तेमाल किया। इस ऑपरेशन को एडीसीपी किरन यादव और डीसीपी अनिल यादव के नेतृत्व में क्राइम ब्रांच और कई थानों की टीम ने मिलकर अंजाम दिया। पुलिस ने गिरोह को पकड़ने वाली टीम को एक लाख रुपये का इनाम भी दिया है। गिरफ्तार लोगों में 92 पुरुष और 27 महिलाएं हैं, जो गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, झारखंड और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों से आए थे।
| बरामद सामान | संख्या/विवरण | |
|---|---|---|
| लैपटॉप | 103 | |
| कॉलिंग मोबाइल | 177 | |
| Apple iPhone | 68 | |
| कंप्यूटर माउस | 99 | |
| हेडफोन | 116 | |
| चार्जर | 111 | |
| वाई-फाई राउटर | 8 | |
| अन्य | VOIP सिस्टम, IBAM डायलर और दस्तावेज |
पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह अच्छी अंग्रेजी बोलने वाले युवाओं को 30 से 40 हजार रुपये महीने की सैलरी पर रखता था और उन्हें अमेरिकी लहजे में बात करने की ट्रेनिंग देता था। ठगी की कुल रकम के बारे में अलग-अलग दावे हैं, जहां कुछ रिपोर्ट्स में यह 45 करोड़ रुपये बताई गई है, वहीं कुछ में यह 250 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। पुलिस अब जब्त किए गए डिजिटल सबूतों की जांच कर रही है और अमेरिकी दूतावास से भी संपर्क किया जा रहा है।