Lucknow के इंदिरा नगर जैन मंदिर में सिद्धचक्र विधान जारी, 1024 अर्घ्य समर्पित कर श्रद्धालुओं ने की आराधना

UP/Lucknow: राजधानी लखनऊ के इंदिरा नगर स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में इन दिनों धार्मिक माहौल है। यहाँ आचार्य सुबल सागर जी महाराज के सानिध्य में 8 दिवसीय सिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन किया जा रहा है। इस अनुष्ठान में ब

UP/Lucknow: राजधानी लखनऊ के इंदिरा नगर स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में इन दिनों धार्मिक माहौल है। यहाँ आचार्य सुबल सागर जी महाराज के सानिध्य में 8 दिवसीय सिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन किया जा रहा है। इस अनुष्ठान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुट रहे हैं और अपनी आस्था व्यक्त कर रहे हैं।

यह विशेष आयोजन 21 जुलाई 2026 को शुरू हुआ था, जो 28 जुलाई 2026 तक चलेगा। समापन के अवसर पर विश्व शांति महायज्ञ का आयोजन होगा। 27 जुलाई को आयोजित कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने 1024 अर्घ समर्पित कर सिद्ध भगवान की आराधना की। आचार्य सुबल सागर जी महाराज ने इस दौरान भगवान के गुणों का वर्णन किया और लोगों को धर्म और संयम के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि सिद्धों की आराधना से पापों का नाश होता है और रुके हुए काम पूरे होते हैं।

इस पूरे अनुष्ठान का प्रबंधन श्री जिन शासन प्रभावना चातुर्मास समिति लखनऊ द्वारा किया जा रहा है। विधान की मुख्य क्रियाएं प्रतिष्ठाचर्या आशीष जी पुण्यंश जी ने संपन्न कराईं। इस आयोजन में 200 जोड़े संकल्प के साथ शामिल हो रहे हैं, जबकि 500 से ज्यादा अन्य महिला और पुरुष श्रद्धालु विधान कर रहे हैं।

विवरण जानकारी
स्थान श्री दिगंबर जैन मंदिर, इंदिरा नगर, लखनऊ
मुख्य गुरु आचार्य सुबल सागर जी महाराज
आयोजन अवधि 21 जुलाई से 28 जुलाई 2026
प्रमुख मंत्र जाप सवा लाख मंत्रों का संकल्प
विशेष अर्पण 256 श्रीफल, ध्वज और अर्घ्य
चातुर्मास प्रारंभ 29 जुलाई (इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान)

कार्यक्रम के दौरान जैन समाज के अध्यक्ष पी के जैन ने विश्व शांति के लिए शांतिधारा की। आयोजन में महामंत्री अभिषेक जैन, सौधर्म इंद्र अक्षय जैन और धन कुबेर आकाश जैन ने भी अपनी भूमिका निभाई। प्रथम घट कलश का सौभाग्य श्रीमती आकांक्षा जैन को मिला और ध्वजारोहण महावीर गंगवाल ने किया। अब सभी की नजरें 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, गोमती नगर से शुरू होने वाले मंगल चातुर्मास पर हैं, जो 9 नवंबर को इंदिरा नगर मंदिर में समाप्त होगा।