UP के सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर की कमी पर हाईकोर्ट सख्त, 6 अगस्त को ACS को कोर्ट में तलब किया
UP: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर की उपलब्धता को लेकर योगी सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने पाया कि सरकार ने वेंटिलेटर की जरूरत और उनकी संख्या को लेकर जो जानकारी दी, उसमें
UP: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर की उपलब्धता को लेकर योगी सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने पाया कि सरकार ने वेंटिलेटर की जरूरत और उनकी संख्या को लेकर जो जानकारी दी, उसमें काफी कमियां हैं। इस मामले में अब चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव (ACS) या प्रमुख सचिव को 6 अगस्त को खुद अदालत में पेश होकर जवाब देना होगा।
यह पूरा मामला ‘वी द पीपल’ नाम की संस्था द्वारा दायर एक जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिका में लखनऊ समेत प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में वेंटिलेटर और अन्य जरूरी इलाज की सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया गया था। कोर्ट ने पहले 22 अप्रैल को सरकार से सभी जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों के संसाधनों का पूरा ब्यौरा मांगा था, लेकिन 16 जुलाई को सरकार ने जो हलफनामा दाखिल किया, वह कोर्ट को अधूरा लगा।
अदालत ने इस बात पर चिंता जताई कि सरकार यह बताने में नाकाम रही कि प्रदेश के अस्पतालों में वास्तव में कितने वेंटिलेटर की जरूरत है और कितने मरीजों को समय पर यह सुविधा नहीं मिल पाती। कोर्ट ने साफ कहा कि अगर बड़े अधिकारी खुद आकर जवाब नहीं देंगे, तो सही जानकारी मिलना मुश्किल होगा। इसके अलावा, कोर्ट ने निजी अस्पतालों और क्लीनिकों की निगरानी के लिए बनी व्यवस्था पर भी सवाल पूछे हैं।
कोर्ट ने सरकार से यह भी पूछा है कि लखनऊ के राम मनोहर लोहिया आयुर्वेद संस्थान और संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्वेद संस्थान की तरह अन्य जिलों में कितने विशेष अस्पताल बनाए गए हैं या बनाने की योजना है। अब 6 अगस्त को होने वाली सुनवाई में ACS को इन सभी सवालों के स्पष्ट और विस्तृत जवाब देने होंगे।