UP: कर्मचारी की मौत के बाद भी खत्म नहीं होता नियमितीकरण का हक, लखनऊ हाई कोर्ट ने बेटे को नौकरी देने का दिया निर्देश

UP/Lucknow : लखनऊ हाई कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि अगर किसी कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है, तो भी उसका नियमितीकरण (Regularization) का अधिकार खत्म नहीं होता है। कोर्ट के मुताबिक यह हक उसके कानूनी उत्तराधिकारि

UP/Lucknow : लखनऊ हाई कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि अगर किसी कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है, तो भी उसका नियमितीकरण (Regularization) का अधिकार खत्म नहीं होता है। कोर्ट के मुताबिक यह हक उसके कानूनी उत्तराधिकारियों के जरिए बना रहता है। अदालत ने ग्रामीण अभियंत्रण विभाग को आदेश दिया है कि वह दिवंगत कर्मचारी के बेटे की मृतक आश्रित नियुक्ति पर विचार करे।

यह पूरा मामला हरदोई के ग्रामीण अभियंत्रण विभाग से जुड़ा है। रिफाकत हुसैन को 1 नवंबर 1985 को कनिष्ठ सहायक के पद पर वर्कचार्ज स्थापना में नियुक्त किया गया था। उनकी मृत्यु 11 अगस्त 2012 को हुई थी। रिफाकत हुसैन का नाम नियमितीकरण के लिए तैयार वरिष्ठता सूची में शामिल था और उनकी नियमितीकरण की प्रक्रिया चल रही थी, लेकिन इस प्रक्रिया के पूरा होने से पहले ही उनका निधन हो गया।

न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की एकल पीठ ने 8-9 अगस्त 2026 को यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने विभाग को निर्देश दिया कि दिवंगत कर्मचारी को उस तारीख से नियमित माना जाए, जिस दिन से वह इसके पात्र थे। साथ ही, उनके बेटे हसन अहमद के मृतक आश्रित नियुक्ति के दावे पर ‘उत्तर प्रदेश सेवाकाल में मृत सरकारी सेवकों के आश्रितों की भर्ती नियमावली, 1974’ के तहत विचार करने को कहा है। नियमितीकरण की प्रक्रिया ‘उत्तर प्रदेश नियमितीकरण नियम, 1998’ के तहत होनी थी।

अदालत ने अधिकारियों के रवैये को गलत पाया और इसे प्रथम दृष्टया अवमाननापूर्ण बताया। इसके चलते कोर्ट ने याचिकाकर्ता को 50,000 रुपये का हर्जाना देने का आदेश दिया है। विभाग को यह पूरी कार्रवाई आदेश की प्रमाणित कॉपी मिलने के दो महीने के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया गया है।