UP: लखनऊ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) को निर्देश दिया है कि वे एक अधिवक्ता का नाम अपनी सतर्कता सूची (Caution List) से तुरंत हटाएं। कोर्ट ने इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई कि बिना क
UP: लखनऊ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) को निर्देश दिया है कि वे एक अधिवक्ता का नाम अपनी सतर्कता सूची (Caution List) से तुरंत हटाएं। कोर्ट ने इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई कि बिना किसी सुनवाई के एक वकील का नाम इस लिस्ट में डाल दिया गया। न्यायालय ने इसे नियमों का उल्लंघन माना है।
कोर्ट ने IBA को क्या निर्देश दिए हैं?
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 3 जून, 2026 को यह आदेश जारी किया। कोर्ट ने IBA को साफ कहा है कि अगले तीन दिनों के भीतर अधिवक्ता का नाम कॉशन लिस्ट से हटाया जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति या प्रोफेशनल का नाम ऐसी लिस्ट में डालने से पहले उन्हें अपनी बात रखने का मौका देना जरूरी है। प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करना हर संस्था के लिए अनिवार्य है।
क्या बैंक पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है?
न्यायालय ने आदेश में यह भी कहा कि संबंधित अधिवक्ता चाहें तो उस निजी बैंक के खिलाफ अलग से कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं, जिसने उनका नाम कॉशन लिस्ट में शामिल करवाया था। कोर्ट का मानना है कि बैंकों को अपनी शक्तियों का इस्तेमाल मनमाने तरीके से नहीं करना चाहिए। इससे पहले भी कोर्ट ने बैंकों द्वारा बिना वजह खाते फ्रीज करने पर नाराजगी जताई थी और कहा था कि बैंक ट्रस्टी की तरह काम करें, जांच एजेंसी की तरह नहीं।
कॉशन लिस्ट को लेकर अन्य अदालतों के फैसले
- दिल्ली हाईकोर्ट: 1 जून, 2026 को ‘भूल जाने के अधिकार’ को मान्यता दी और बरी हुए लोगों के नाम सर्च इंजन से हटाने का निर्देश दिया।
- कर्नाटक हाईकोर्ट: 24 फरवरी, 2026 को IBA को एक याचिकाकर्ता का नाम TPE कॉशन लिस्ट से हटाने का आदेश दिया।
- बॉम्बे हाईकोर्ट: 18 फरवरी, 2024 को एक वकील का नाम लिस्ट से हटाने की याचिका स्वीकार की क्योंकि वहां धोखाधड़ी का कोई सबूत नहीं था।
Frequently Asked Questions (FAQs)
IBA की कॉशन लिस्ट क्या होती है?
यह एक सतर्कता सूची होती है जिसमें बैंक उन संस्थाओं या व्यक्तियों के नाम डालते हैं जिन पर उन्हें संदेह होता है। इसमें नाम आने से बैंकिंग लेन-देन और प्रोफेशनल काम में दिक्कत आती है।
कोर्ट ने इस मामले में क्या मुख्य बात कही?
कोर्ट ने कहा कि किसी का नाम लिस्ट में डालने से पहले उचित प्रक्रिया का पालन करना और सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य है, जिसे इस मामले में नजरअंदाज किया गया था।