UP: लखनऊ हाई कोर्ट बेंच ने पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर एक बहुत जरूरी फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कह दिया है कि किसी भी मामले में अगर पुलिस को दोबारा जांच यानी अग्रिम विवेचना करनी है, तो उसे पहले अदालत से मंजूरी लेनी
UP: लखनऊ हाई कोर्ट बेंच ने पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर एक बहुत जरूरी फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कह दिया है कि किसी भी मामले में अगर पुलिस को दोबारा जांच यानी अग्रिम विवेचना करनी है, तो उसे पहले अदालत से मंजूरी लेनी होगी। बिना कोर्ट की अनुमति के की गई ऐसी जांच कानूनी रूप से मान्य नहीं होगी।
बिना अनुमति जांच क्यों नहीं होगी मान्य
जस्टिस श्री प्रकाश सिंह की एकल पीठ ने 15 मई 2026 को यह निर्णय दिया। कोर्ट ने कहा कि पुलिस अपनी मर्जी से या किसी बड़े अधिकारी के निर्देश पर बिना कोर्ट को बताए दोबारा जांच नहीं शुरू कर सकती। इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट के ‘प्रमोद कुमार बनाम उत्तर प्रदेश राज्य’ मामले का हवाला दिया गया, जिसमें जांच से पहले कोर्ट की अनुमति को अनिवार्य बताया गया था।
किन आदेशों को कोर्ट ने रद्द किया
यह पूरा मामला सैयद मोहम्मद हमजा की एक याचिका से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि पुलिस ने नियमों का पालन नहीं किया था, इसलिए जस्टिस श्री प्रकाश सिंह ने निम्नलिखित आदेशों को रद्द कर दिया है:
- 29 अप्रैल 2023 को दाखिल की गई अनुपूरक चार्जशीट।
- 3 फरवरी 2026 को जारी किया गया दूसरा संज्ञान आदेश।
- 13 फरवरी 2026 का डिस्चार्ज आदेश।
क्या था पूरा मामला और सरकार का जवाब
अंबेडकर नगर के एक मामले में पुलिस अधीक्षक (SP) के निर्देश पर दोबारा जांच की गई थी। जब यह मामला कोर्ट पहुँचा, तो उत्तर प्रदेश सरकार ने खुद स्वीकार किया कि इस अग्रिम जांच के लिए ट्रायल कोर्ट से कोई पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि एक ही आपराधिक मामले में दो बार संज्ञान लेना कानूनी रूप से गलत है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या पुलिस किसी मामले की दोबारा जांच कर सकती है?
हाँ, लेकिन लखनऊ हाई कोर्ट के फैसले के अनुसार, पुलिस को दोबारा जांच (Further Investigation) शुरू करने से पहले संबंधित अदालत से लिखित मंजूरी लेना अनिवार्य है।
बिना कोर्ट की अनुमति के की गई जांच का क्या होगा?
अदालत ने स्पष्ट किया है कि बिना पूर्व अनुमति के की गई अग्रिम विवेचना कानूनी रूप से मान्य नहीं होगी और उसे अवैध माना जाएगा।