UP: लखनऊ स्थित इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के हक में एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के उस आदेश को खारिज कर दिया है
UP: लखनऊ स्थित इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के हक में एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के उस आदेश को खारिज कर दिया है, जिसमें रिटायर्ड कर्मचारियों को वास्तविक वेतन के आधार पर उच्च पेंशन देने से मना किया गया था। इस फैसले से अब कई सेवानिवृत्त कर्मियों को उनकी वास्तविक सैलरी के हिसाब से ज्यादा पेंशन मिल सकेगी।
कोर्ट ने पेंशन के संबंध में क्या आदेश दिया है?
न्यायमूर्ति श्री प्रकाश सिंह की पीठ ने साफ किया कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को कर्मचारी पेंशन योजना, 1995 (EPS-95) के तहत उनके वास्तविक वेतन पर उच्च पेंशन का लाभ मिलना चाहिए। ईपीएफओ ने पेंशन की सीमा 15,000 रुपये और HAL ट्रस्ट के नियमों में इसे 6,500 रुपये तय किया था, जिसे कोर्ट ने गलत माना। अदालत ने कहा कि जब कंपनी और कर्मचारी दोनों ने वास्तविक वेतन पर योगदान दिया है, तो पेंशन भी उसी आधार पर मिलनी चाहिए।
अब आगे की प्रक्रिया क्या होगी?
हाईकोर्ट ने क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त को निर्देश दिया है कि वे सर्वोच्च न्यायालय के पुराने फैसलों और कोर्ट की टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए कर्मचारियों के पेंशन विकल्पों का नए सिरे से मूल्यांकन करें। कोर्ट ने आदेश दिया है कि कर्मचारियों द्वारा दिए गए संयुक्त विकल्प फॉर्म पर दोबारा विचार किया जाए। इस मामले में HAL प्रबंधन ने भी उच्च पेंशन लाभ देने के लिए अपनी सहमति दे दी है।
केस से जुड़ी मुख्य जानकारी
| विवरण |
जानकारी |
| निर्णय की तारीख |
12 मई, 2026 |
| कोर्ट/पीठ |
इलाहाबाद हाईकोर्ट, लखनऊ पीठ |
| संबंधित जज |
न्यायमूर्ति श्री प्रकाश सिंह |
| मुख्य नियम |
कर्मचारी पेंशन योजना, 1995 (EPS-95) |
| प्रभावित लोग |
HAL के सेवानिवृत्त कर्मचारी |
Frequently Asked Questions (FAQs)
HAL के रिटायर्ड कर्मचारियों को अब कितनी पेंशन मिलेगी?
कोर्ट के आदेश के अनुसार, अब कर्मचारियों को ईपीएफओ की 15,000 रुपये या ट्रस्ट की 6,500 रुपये की सीमा के बजाय उनके वास्तविक वेतन (Actual Salary) के आधार पर उच्च पेंशन मिलेगी।
इस फैसले का आधार क्या था?
कोर्ट ने माना कि चूंकि नियोक्ता (HAL) और कर्मचारी दोनों ने वास्तविक वेतन पर पेंशन फंड में योगदान दिया था, इसलिए उन्हें उसी आधार पर पेंशन पाने का वैधानिक अधिकार है।