Lucknow में गोमती को बचाने की तैयारी, 9 नालों को रोकने के लिए जल निगम ने मांगी जमीन
Lucknow: राजधानी की गोमती नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) से जमीन की मांग की है ताकि नदी में गिरने वाले 9 नालों को रोका जा सके और 3 नए
Lucknow: राजधानी की गोमती नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) से जमीन की मांग की है ताकि नदी में गिरने वाले 9 नालों को रोका जा सके और 3 नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) लगाए जा सकें। इस कदम से शहर का गंदा पानी सीधे नदी में जाने से रुकेगा।
जल निगम ने इन नालों के इंटरसेप्शन और डायवर्जन (I&D) का काम शुरू करने के लिए भूमि मांगी है। इससे पहले जनवरी 2026 में जियामऊ और वजीरगंज इलाकों में नए STP लगाने की राह साफ हुई थी। वजीरगंज में 60 एमएलडी क्षमता का प्लांट लगेगा जो तीन बड़े नालों को जोड़ेगा, जिससे करीब 40 एमएलडी गंदा पानी नदी में जाने से बचेगा। वहीं जियामऊ में भी चार प्रमुख नालों के ओवरफ्लो को रोकने के लिए नए प्लांट की योजना है।
बसंतकुंज इलाके के लिए 145 एमएलडी क्षमता का एक बड़ा STP प्रस्तावित है, जिसकी अनुमानित लागत 671 करोड़ रुपये है। इसका प्रोजेक्ट रिपोर्ट राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) को भेजा गया है। इसके अलावा मस्तेमऊ और एकाना नालों के सीवेज के लिए मस्तेमऊ में 5 एमएलडी का छोटा प्लांट भी लगाया जाएगा।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ प्लांट लगाना काफी नहीं है, बल्कि उन्हें ईमानदारी से चलाना जरूरी है। डॉ. वेंकटेश दत्ता जैसे जानकारों ने सुझाव दिया है कि नालों के मुहानों पर जाली लगानी चाहिए और नदी की तलहटी में जमा गाद को हटाना चाहिए ताकि पानी का बहाव बेहतर हो सके। साथ ही नदी के आसपास के करीब 10 हजार तालाबों को दोबारा जीवित करने की जरूरत है ताकि गोमती का जलस्तर और शुद्धता बनी रहे।