UP : लखनऊ के 1090 चौराहे समेत पूरे शहर में ज्येष्ठ माह के चौथे बड़े मंगल पर भक्ति और पर्यावरण संरक्षण का अनोखा संगम दिखा। 26 मई, 2026 को आयोजित इस ‘हरित भंडारा’ के जरिए लोगों को प्लास्टिक मुक्त भविष्य का संदे
UP : लखनऊ के 1090 चौराहे समेत पूरे शहर में ज्येष्ठ माह के चौथे बड़े मंगल पर भक्ति और पर्यावरण संरक्षण का अनोखा संगम दिखा। 26 मई, 2026 को आयोजित इस ‘हरित भंडारा’ के जरिए लोगों को प्लास्टिक मुक्त भविष्य का संदेश दिया गया। भीषण गर्मी के बावजूद बड़ी संख्या में लोग भंडारों में शामिल हुए और प्रसाद के साथ-साथ पौधे भी बांटे गए।
ग्रीन बड़ा मंगल और प्लास्टिक मुक्त अभियान की खास बातें
शहर में ‘ग्रीन बड़ा मंगल’ पहल के तहत इस बार ‘ज़ीरो वेस्ट’ भंडारों पर जोर दिया गया। पूर्व महापौर संयुक्ता भाटिया के ‘मंगलमान अभियान’ और समाजसेवी शिप्रा पाठक की संस्था ‘पंचतत्व’ ने प्लास्टिक और थर्माकोल के इस्तेमाल को रोकने की अपील की। शिप्रा पाठक ने 55,000 हरे पत्तलों का मुफ्त वितरण किया ताकि गर्म भोजन से निकलने वाले हानिकारक रसायनों से बचा जा सके। समाज कल्याण राज्य मंत्री असीम अरुण ने भी लोगों से पत्तल और कागज के गिलासों का उपयोग करने का आग्रह किया।
प्रशासन के नियम और सफाई व्यवस्था
लखनऊ में 19 जुलाई, 2026 तक धारा-163 लागू है, जिसके कारण किसी भी धार्मिक आयोजन या भंडारे के लिए पूर्व अनुमति लेना जरूरी है। बिना अनुमति के पांच या अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर रोक है। साथ ही, रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर बजाने पर पाबंदी लगाई गई है। नगर निगम ने आयोजकों से कहा है कि कार्यक्रम खत्म होने से एक घंटा पहले सूचित करें ताकि सफाई समय पर हो सके।
पर्यावरण जागरूकता और पौधों का वितरण
इस बार भंडारों में केवल भोजन ही नहीं, बल्कि हरियाली भी बांटी गई। प्लांट हाउस नर्सरी के बद्रीनाथ अग्निहोत्री और अन्य संस्थाओं ने आम, नीम, पीपल, जामुन और करी पत्ते जैसे पौधे वितरित किए। अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के संदीप बंसल ने जोर दिया कि भंडारे पूरी तरह प्रदूषण मुक्त होने चाहिए और सड़कों पर गंदगी नहीं फैलनी चाहिए।
Frequently Asked Questions (FAQs)
लखनऊ में भंडारा आयोजित करने के लिए क्या नियम हैं?
शहर में धारा-163 लागू होने के कारण भंडारे के लिए पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है। रात 12 से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर का प्रयोग वर्जित है और सफाई के लिए नगर निगम को पहले सूचित करना होगा।
हरित भंडारा (Green Bhandara) क्या है?
यह एक ऐसी पहल है जिसमें प्लास्टिक और थर्माकोल की जगह पत्तल, दोने और मिट्टी के बर्तनों का उपयोग किया जाता है, साथ ही लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के लिए पौधे बांटे जाते हैं।