UP : लखनऊ के गौरैया संस्कृति संस्थान द्वारा आयोजित 10 दिवसीय लोकगीत कार्यशाला 11 मई, 2026 को समाप्त हुई। इस कार्यक्रम का मकसद लुप्त होती अवधी लोक परंपराओं को बचाना और नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ना था। कार्यशाला के
UP : लखनऊ के गौरैया संस्कृति संस्थान द्वारा आयोजित 10 दिवसीय लोकगीत कार्यशाला 11 मई, 2026 को समाप्त हुई। इस कार्यक्रम का मकसद लुप्त होती अवधी लोक परंपराओं को बचाना और नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ना था। कार्यशाला के आखिरी दिन प्रशिक्षुओं ने अपनी कला का प्रदर्शन किया।
कार्यशाला में क्या सिखाया गया और कौन शामिल हुए
इस ट्रेनिंग के दौरान प्रतिभागियों को बधाई गीत, दादरा, सोहर, नकटा, सरिया और लोक भजन जैसी विधाओं का अभ्यास कराया गया। संस्थान के उपाध्यक्ष अमित के मुताबिक, इस कार्यशाला में करीब 30 महिलाओं ने हिस्सा लिया। इसमें कल्पना श्रीवास्तव, रमा सिंह, सुनीता निगम, लता तिवारी और निकिता मिश्रा जैसी कई महिलाएं शामिल रहीं। 5 मई से गोमतीनगर के वास्तुखंड में एक विशेष सत्र भी चला, जिसमें 11 पारंपरिक गीत सिखाए गए।
प्रशिक्षण का उद्देश्य और समापन कार्यक्रम
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों के आत्मविश्वास को बढ़ाना और उनके प्रस्तुति कौशल को परखना था। समापन के दिन वरिष्ठ गायिका Indira Srivastava के घर पर एक कार्यक्रम रखा गया, जहां सभी प्रशिक्षुओं ने अलग-अलग लोकगीत गाकर अपनी प्रतिभा दिखाई। संस्थान की संस्थापक Ranjana Mishra ने बताया कि यह प्रयास अवधी संस्कृति को सहेजने की दिशा में एक जरूरी कदम है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
गौरैया संस्कृति संस्थान की लोकगीत कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इस कार्यशाला का उद्देश्य लुप्त हो रही अवधी लोक परंपराओं को संरक्षित करना, नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ना और प्रतिभागियों के आत्मविश्वास व प्रस्तुति कौशल का आकलन करना था।
कार्यशाला में किन-किन लोकगीतों का प्रशिक्षण दिया गया?
प्रशिक्षुओं को बधाई गीत, दादरा, सोहर, नकटा, सरिया और लोक भजन जैसी पारंपरिक विधाओं का प्रशिक्षण दिया गया।