Lucknow में नकली दवाओं का बड़ा खेल, उत्तराखंड में फैक्ट्री पकड़ी गई, मुख्य सप्लायर अरुण टुंडा गिरफ्तार
Lucknow/UP: राजधानी लखनऊ में ब्रांडेड कंपनियों के रैपर लगाकर नकली दवाएं बेचने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। यूपी पुलिस और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) की टीम ने इस मामले के मुख्य सप्लायर राजेंद्र सिंह उ
Lucknow/UP: राजधानी लखनऊ में ब्रांडेड कंपनियों के रैपर लगाकर नकली दवाएं बेचने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। यूपी पुलिस और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) की टीम ने इस मामले के मुख्य सप्लायर राजेंद्र सिंह उर्फ अरुण टुंडा को गिरफ्तार किया है। इस गिरफ्तारी के बाद जांच की सुई उत्तराखंड पहुंची, जहां एक अवैध फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ है।
मामले की शुरुआत 19 जुलाई 2026 को हुई जब लखनऊ के अमीनाबाद थाने में नकली दवाओं के भंडारण और बिक्री को लेकर मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने मौके से 43 तरह की नकली दवाएं जब्त की थीं। इसके बाद 22 जुलाई को क्राइम ब्रांच ने मुख्य वितरक राजेंद्र सिंह उर्फ अरुण टुंडा को गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन से दबोचा।
आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर 23 जुलाई को यूपी FSDA, गाजियाबाद क्राइम ब्रांच और उत्तराखंड ड्रग विभाग की संयुक्त टीम ने देहरादून के देवीपुर न्यू हाईवे रोड पर छापेमारी की। वहां एक अवैध फैक्ट्री चल रही थी, जिसे पुलिस ने सील कर दिया। इस फैक्ट्री से करीब 1 करोड़ से 7 करोड़ रुपये मूल्य की नकली दवाएं, पैकिंग का सामान और मशीनें बरामद हुई हैं।
इस गिरोह ने सिप्ला, ल्यूपिन, डॉ. रेड्डीज, सन फार्मा और एबॉट जैसी बड़ी कंपनियों के नाम का इस्तेमाल किया। जांच में Flozen AA, Thrombophob Ointment और Razo-D Capsules जैसी दवाओं की नकली खेप मिली है। FSDA आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने बताया कि अमीनाबाद से मिली ‘Flozen AA’ टैबलेट की जांच में वह नकली पाई गई थी।
नकली दवाओं के इस खतरे को देखते हुए FSDA उत्तर प्रदेश ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब लखनऊ समेत पूरे राज्य में नए थोक दवा लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया पर अगले आदेश तक रोक लगा दी गई है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे सभी जिलों में दवा विक्रेताओं के लाइसेंस की जांच करें और गोदामों का भौतिक निरीक्षण करें। लखनऊ के अमीनाबाद में थ्रोम्बोफोब ऑइंटमेंट बेचने वाली चार फर्मों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की गई है।
देहरादून पुलिस कप्तान परमेंद्र डोभाल के मुताबिक, फैक्ट्री को सील कर दवाओं को लैब परीक्षण के लिए भेज दिया गया है। FSDA संयुक्त आयुक्त बृजेश कुमार ने बताया कि यह पूरी कार्रवाई खुफिया जानकारी और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर की गई, जिससे लखनऊ और गाजियाबाद के बाद देहरादून का कनेक्शन सामने आया।