Lucknow में नकली दवाओं के बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़, राजस्थान के अलवर का मुख्य आरोपी गिरफ्तार
Lucknow/UP : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में नकली दवाओं के एक बहुत बड़े कारोबार का खुलासा हुआ है। इस नेटवर्क के तार राजस्थान, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश तक जुड़े हुए हैं। जांच में सामने आया है कि लखनऊ को इन नकली दवाओं क
Lucknow/UP : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में नकली दवाओं के एक बहुत बड़े कारोबार का खुलासा हुआ है। इस नेटवर्क के तार राजस्थान, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश तक जुड़े हुए हैं। जांच में सामने आया है कि लखनऊ को इन नकली दवाओं के वितरण केंद्र के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था, जिससे लोगों की सेहत के साथ बड़ा खिलवाड़ हो रहा था।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) और पुलिस ने जुलाई महीने में कई बार छापेमारी की। FSDA आयुक्त डॉ. रोशन जैकब के नेतृत्व में चलाए गए इस अभियान में 6 जुलाई से 23 जुलाई के बीच लगातार कार्रवाई की गई। जांच में राजस्थान के अलवर निवासी भूपेंद्र शर्मा का नाम मुख्य आरोपी के रूप में सामने आया है, जो पहले भी नकली दवा मामले में जेल जा चुका है। पुलिस ने विमल कुमार सिंह और संदीप श्रीवास्तव जैसे अन्य आरोपियों को भी पकड़ा है।
जांच एजेंसियों ने अमीनाबाद और बक्शी का तालाब (बीकेटी) जैसे इलाकों में छापेमारी कर भारी मात्रा में संदिग्ध दवाएं बरामद कीं। आरोपियों की कार्यप्रणाली यह थी कि वे नामी कंपनियों की हूबहू पैकेजिंग तैयार करते थे, लेकिन उसमें जानबूझकर स्पेलिंग और प्रिंटिंग की छोटी गलतियां छोड़ देते थे। ये दवाएं बिना किसी बिल के सस्ते दामों पर बेची जाती थीं।
| तारीख/क्षेत्र | कार्रवाई और बरामदगी |
|---|---|
| 18 जुलाई (बीकेटी) | एक वैन से 2157 बोतल संदिग्ध दवाएं (4.37 लाख रुपये) बरामद |
| 19 जुलाई (लखनऊ व गोंडा) | करीब 24 लाख रुपये की संदिग्ध दवाएं सील |
| 20 जुलाई (लखनऊ) | 21 लाख रुपये की नकली एलोपैथिक दवाएं बरामद |
| 8-9 जुलाई (अमीनाबाद) | अवैध गोदाम से 21 लाख रुपये की दवाएं सील |
| कुल अभियान (जुलाई) | करीब 20 करोड़ की नकली दवाएं जब्त, 50 से ज्यादा स्टोर पर कार्रवाई |
FSDA के सहायक आयुक्त ब्रजेश कुमार ने बताया कि इस नेटवर्क का फैलाव पश्चिमी यूपी से वाराणसी तक है। मुख्य आरोपी भूपेंद्र शर्मा और उसके साथियों के खिलाफ अमीनाबाद थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। विभाग ने आम लोगों से अपील की है कि यदि किसी दवा की पैकिंग, प्रिंटिंग या कीमत पर संदेह हो, तो उसे न खरीदें और तुरंत पुलिस या विभाग को इसकी जानकारी दें।