Lucknow में नकली दवाओं के सिंडिकेट का भंडाफोड़, 9 फर्में सील और 5 लोगों पर FIR दर्ज

Lucknow: राजधानी लखनऊ के अमीनाबाद इलाके में नकली और संदिग्ध दवाओं के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। पिछले 15 दिनों में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने कड़ी कार्रवाई करते हुए कई फर्मों को सील किया है और जालस

Lucknow: राजधानी लखनऊ के अमीनाबाद इलाके में नकली और संदिग्ध दवाओं के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। पिछले 15 दिनों में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने कड़ी कार्रवाई करते हुए कई फर्मों को सील किया है और जालसाजों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसा है। इस पूरे मामले में फर्जी बिलिंग और जीएसटी चोरी जैसे गंभीर खुलासे हुए हैं।

FSDA आयुक्त डॉ. रोशन जैकब के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई में 15.50 लाख रुपये की दवाएं जब्त की गईं और 32 सैंपल जांच के लिए भेजे गए। जांच में पता चला कि कुछ लोग बंद हो चुकी फर्मों के लाइसेंस और पुराने सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर कारोबार चला रहे थे। इस सिंडिकेट के तार केवल लखनऊ ही नहीं बल्कि राजस्थान और उत्तराखंड तक फैले हुए हैं।

अमीनाबाद थाने में मनीष मिश्रा, आमोद कुमार मिश्रा, सन्नी कश्यप, देवेंद्र शुक्ला और राहुल नाम के पांच लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। जांच में पाया गया कि मिश्रा एसोसिएट्स, मिश्रा मेडिकल एजेंसी और श्री अशोक फार्मास्युटिकल्स जैसी फर्मों के बीच बिना किसी वास्तविक दवा सप्लाई के सिर्फ कागजों पर क्रॉस-बिलिंग और फर्जी बैंक लेनदेन किया जा रहा था ताकि नकली दवाओं को असली दिखाया जा सके।

प्रशासन ने इस मामले में कुल 9 संदिग्ध फर्मों के कामकाज पर रोक लगा दी है और उनके वित्तीय रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। इन फर्मों के नाम एसकेजी मेडिकल्स, गायत्री फार्मा एंड सर्जिकल, हेल्थ प्लस, एमके फार्मा, मां अम्बे फार्मा, आरएन फार्मा, सनलाइट फार्मा, सोनल फार्मा और सुपरविजन फार्मा हैं। भारत फार्मा और एम.डी.एच. फार्मा के मामले में करोड़ों के लेनदेन का रिकॉर्ड मिला लेकिन मौके पर कोई दवा स्टॉक नहीं मिला।

योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत प्रदेशभर के औषधि निरीक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे संदिग्ध थोक दवा कारोबारियों और सप्लाई चेन की कड़ी निगरानी करें। अमीनाबाद में एक बिना लाइसेंस वाला गोदाम भी मिला जहां ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन जैसी दवाएं गलत तरीके से रखी गई थीं। इसके अलावा एक ब्रांडेड एंटीबायोटिक ‘ऑगमेंटिन डुओ-625’ को उसकी असली कीमत से बहुत कम दाम पर खरीदे जाने का मामला भी सामने आया है।