Lucknow में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, अमेरिका के लोगों से 2 अरब की ठगी, 7 गिरफ्तार

Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक पॉश इलाके में पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है। यह पूरा खेल गोमतीनगर विस्तार के सुशांत गोल्फ सिटी इलाके में स्थित ओमेक्स आर-2 अपार्टमेंट से चल

Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक पॉश इलाके में पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है। यह पूरा खेल गोमतीनगर विस्तार के सुशांत गोल्फ सिटी इलाके में स्थित ओमेक्स आर-2 अपार्टमेंट से चल रहा था। पुलिस ने ‘ऑपरेशन साय-वज्र’ के तहत यह कार्रवाई की है, जिसमें अमेरिका के नागरिकों को अपना निशाना बनाया जा रहा था।

लखनऊ पुलिस की क्राइम ब्रांच ने गुरुवार देर रात ओमेक्स अपार्टमेंट में छापेमारी की, जो शुक्रवार सुबह 5 बजे तक चली। इस दौरान पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है और आठ अन्य लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपियों में अहमदाबाद के पुनीत वर्मा और देवेंद्र पटेल शामिल हैं। इनके अलावा कोलकाता के मोहम्मद सोहेल, मोहम्मद शाहनवाज, मोहम्मद इमरान, मोहम्मद रियाज और सज्जाद हुसैन को भी पकड़ा गया है। जांच में सामने आया कि पुनीत का भाई यशचंद्र प्रकाश वर्मा अहमदाबाद से इस पूरे नेटवर्क को संभाल रहा था और उसने अमेरिका में भी अपने एजेंट बना रखे थे।

यह गिरोह बहुत ही शातिर तरीके से काम करता था। ये लोग माइक्रोसॉफ्ट टेक्निकल सपोर्ट या अमेरिकी सरकारी एजेंसी (FTC) के अधिकारी बनकर कॉल करते थे। सबसे पहले पीड़ितों के कंप्यूटर पर वायरस या मैलवेयर का पॉप-अप भेजा जाता था, जिसमें एक टोल-फ्री नंबर होता था। जब परेशान होकर अमेरिकी नागरिक उस नंबर पर कॉल करते, तो उन्हें डराया जाता था कि उनका बैंक खाता या सोशल सिक्योरिटी नंबर खतरे में है और उन्हें गिरफ्तारी की धमकी दी जाती थी।

ठगी के इस खेल में ‘ओपनर’ और ‘क्लोजर’ नाम की दो टीमें काम करती थीं। ओपनर पहले ग्राहक का भरोसा जीतता था, फिर कॉल क्लोजर को ट्रांसफर कर दी जाती थी। क्लोजर फिर पीड़ित को अमेज़न या वॉलमार्ट के गिफ्ट कार्ड, क्रिप्टोकरेंसी या कैश भेजने के लिए मनाता था। यह कॉल सेंटर अमेरिकी समय के हिसाब से शाम 7 बजे से रात 3 बजे तक चलता था और कर्मचारियों को अंग्रेजी की स्क्रिप्ट हिंदी में लिखकर याद कराई जाती थी।

पुलिस उपायुक्त अनिल यादव और एडीसीपी किरण यादव ने बताया कि इस गिरोह ने पिछले छह महीनों में 2 अरब रुपये से ज्यादा की ठगी की है। वे हर दिन करीब 10 से 12 लोगों को शिकार बनाते थे। मौके से बड़ी संख्या में लैपटॉप, मोबाइल, हेडफोन, वाई-फाई राउटर और विदेशी नागरिकों का डेटा बरामद हुआ है। पुलिस अब अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों के साथ टोल-फ्री नंबर साझा करेगी ताकि विदेश में बैठे मददगारों को पकड़ा जा सके। इससे पहले 1 जुलाई को भी गोमतीनगर की समिट बिल्डिंग से एक फर्जी कॉल सेंटर पकड़ा गया था, पुलिस अब इन दोनों गिरोहों के बीच संबंध की जांच कर रही है।