UP: लखनऊ में ईपीएस-95 राष्ट्रीय संघर्ष समिति (NAC) का 9वां स्थापना दिवस बुधवार, 10 जून 2026 को मनाया गया। इस कार्यक्रम में अलग-अलग विभागों के बहुत सारे पेंशनरों ने हिस्सा लिया। यह आयोजन पूरे देश में 6 जून से 12 जून 2026
UP: लखनऊ में ईपीएस-95 राष्ट्रीय संघर्ष समिति (NAC) का 9वां स्थापना दिवस बुधवार, 10 जून 2026 को मनाया गया। इस कार्यक्रम में अलग-अलग विभागों के बहुत सारे पेंशनरों ने हिस्सा लिया। यह आयोजन पूरे देश में 6 जून से 12 जून 2026 तक चलने वाले स्थापना दिवस सप्ताह का हिस्सा है, जिसे संकल्प दिवस और जन जागरण अभियान के रूप में मनाया जा रहा है।
पेंशनरों की मुख्य मांगें क्या हैं?
समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमांडर अशोक रावत के नेतृत्व में पेंशनभोगी अपनी लंबित मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं। उनकी सबसे बड़ी मांग न्यूनतम मासिक पेंशन को ₹1,000 से बढ़ाकर ₹7,500 करने की है। इसके साथ ही पेंशनरों ने महंगाई भत्ता (DA) और मुफ्त चिकित्सा सुविधाओं की भी मांग की है ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें।
सरकारी स्थिति और वर्तमान नियम क्या हैं?
फिलहाल EPS-95 के तहत न्यूनतम पेंशन ₹1,000 प्रति माह है। EPFO और श्रम मंत्रालय ने साफ किया है कि पेंशन को ₹7,500 करने के सोशल मीडिया दावे भ्रामक हैं और ऐसा कोई प्रस्ताव अभी मंजूर नहीं हुआ है। हालांकि, सरकार पेंशन बढ़ाने पर विचार कर रही है।
| विवरण |
जानकारी |
| वर्तमान न्यूनतम पेंशन |
₹1,000 प्रति माह |
| मांगी गई पेंशन |
₹7,500 प्रति माह |
| संभावित संशोधन (समीक्षाधीन) |
₹1,500 से ₹3,000 तक |
| प्रस्तावित वेतन सीमा वृद्धि |
₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 |
| सरकार का योगदान |
वेतन का 1.16% |
आगे क्या होने वाला है?
पेंशन संशोधन से जुड़े ज्ञापनों को जमा करने की तारीख अब 15 जून 2026 तक बढ़ा दी गई है। इसके अलावा, अपनी मांगों को मजबूती से रखने के लिए 28 जून 2026 को हैदराबाद में पेंशनरों का एक बड़ा महासम्मेलन आयोजित किया जाएगा। स्थापना दिवस सप्ताह के दौरान देश के अलग-अलग राज्यों में स्वास्थ्य शिविर और जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
EPS-95 पेंशनरों की मुख्य मांग क्या है?
पेंशनरों की मुख्य मांग न्यूनतम मासिक पेंशन को ₹1,000 से बढ़ाकर ₹7,500 करना है, जिसमें महंगाई भत्ता और मुफ्त इलाज की सुविधा भी शामिल हो।
क्या सरकार ने पेंशन ₹7,500 बढ़ाने की मंजूरी दे दी है?
नहीं, EPFO और श्रम मंत्रालय के अनुसार यह दावा भ्रामक है। सरकार वर्तमान में ₹1,500 से ₹3,000 तक की वृद्धि की समीक्षा कर रही है।