Lucknow के नालों में पानी से ज्यादा प्लास्टिक, कागजों पर सिमटा रहा पॉलिथीन बैन
Lucknow: राजधानी लखनऊ के नाले अब पानी बहाने के बजाय प्लास्टिक और पॉलिथीन डंप करने का अड्डा बन गए हैं। शहर में पॉलिथीन पर रोक तो लगाई गई है, लेकिन जमीन पर इसका असर नहीं दिख रहा है। आलम यह है कि नालों में पानी कम और प्लास्
Lucknow: राजधानी लखनऊ के नाले अब पानी बहाने के बजाय प्लास्टिक और पॉलिथीन डंप करने का अड्डा बन गए हैं। शहर में पॉलिथीन पर रोक तो लगाई गई है, लेकिन जमीन पर इसका असर नहीं दिख रहा है। आलम यह है कि नालों में पानी कम और प्लास्टिक का कचरा ज्यादा जमा है, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
हाल ही में सामने आया कि मानसून से पहले नगर निगम की सफाई व्यवस्था पूरी तरह फेल रही। अस्पतालों, पार्कों और रिहायशी इलाकों के पास नाले प्लास्टिक से पूरी तरह चोक हो चुके हैं। सफाई के नाम पर हर साल भारी पैसा खर्च किया जाता है, लेकिन छोटे नाले अब भी कचरे से भरे हुए हैं। इस लापरवाही का असर ऐसा हुआ कि 18 जून को डिप्टी सीएम के आवास में भी सीवर और नाले का पानी भर गया, जिसका एक बड़ा कारण नगर निगम द्वारा नालों में कचरा डालना बताया गया।
सिर्फ नाले ही नहीं, बल्कि गोमती नदी की हालत भी खराब है। गोमती बैराज के पास मरम्मत कार्य के दौरान जब नदी का तल सूखा, तो वहां भारी मात्रा में प्लास्टिक कचरा और कीचड़ जमा मिला। पर्यावरण विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह प्लास्टिक टूटकर माइक्रोप्लास्टिक में बदल रहा है, जो पानी के जीवों और इंसानों की फूड चेन में घुसकर सेहत बिगाड़ सकता है।
शहर के इंदिरा नगर, खदरा, अलीगंज और गोमती नगर जैसे इलाकों में लोग अब भी खुले में कचरा फेंक रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन समय पर नहीं होता, इसलिए उन्हें मजबूरी में प्लास्टिक और अन्य कचरा बाहर फेंकना पड़ता है।
नगर निगम की मेयर सुषमा खर्कवाल ने माना कि पॉलिथीन बनाने और बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई काफी कम हुई है। हालांकि दुकानदारों से करीब 52.27 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया, लेकिन 75 माइक्रोन से कम वाले प्लास्टिक बैग का इस्तेमाल अब भी जारी है। नगर निगम के अधिकारी इसे ‘जीरो नेट वेस्ट सिटी’ बता रहे हैं और दावा करते हैं कि शिवरी प्लांट में रोजाना 2,100 मीट्रिक टन कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण हो रहा है। लेकिन शहर की सड़कों और नालों में तैरता प्लास्टिक इस दावे की पोल खोल रहा है।