UP : लखनऊ के जिलाधिकारी (DM) और अपर जिलाधिकारी (ADM न्यायिक) को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने दोनों अधिकारियों पर 20-20 हजार रुपये का व्यक्तिगत जुर्माना लगाया है। अदालत ने साफ कह दिया है
UP : लखनऊ के जिलाधिकारी (DM) और अपर जिलाधिकारी (ADM न्यायिक) को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने दोनों अधिकारियों पर 20-20 हजार रुपये का व्यक्तिगत जुर्माना लगाया है। अदालत ने साफ कह दिया है कि यह पैसा सरकारी खजाने से नहीं, बल्कि अधिकारियों को अपने निजी खातों से देना होगा। यह कार्रवाई एक जमीन विवाद मामले में अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम करने की वजह से हुई है।
अधिकारियों से क्यों वसूला गया जुर्माना
यह पूरा मामला निवास कॉलोनाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड की एक याचिका से जुड़ा है। न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की कोर्ट ने पाया कि DM और ADM न्यायिक ने अपनी कानूनी सीमाओं का उल्लंघन किया। ADM ने 10 मार्च 2026 को एक आदेश दिया था, जिसमें कंपनी को विवादित जमीन बेचने और वहां निर्माण कार्य करने से रोका गया था। कोर्ट ने इस आदेश को निरस्त कर दिया क्योंकि अधिकारियों ने बिना उचित जांच और बिना अधिकार के यह कदम उठाया था।
किन नियमों का हुआ उल्लंघन
कोर्ट ने बताया कि उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 104 और 105 के तहत ऐसी कार्रवाई शुरू करने का हक सिर्फ उपजिलाधिकारी (SDM) के पास होता है। नियम 103 के मुताबिक, पहले लेखपाल की रिपोर्ट लेनी होती है और फिर SDM द्वारा नोटिस देकर सुनवाई की जाती है। इस मामले में इन सभी प्रक्रियाओं को नजरअंदाज किया गया। कोर्ट ने इसे ‘प्रशासनिक अतिरेक’ माना और कहा कि इससे याचिकाकर्ता को बेवजह परेशानी हुई।
शिकायतकर्ता वकील पर भी सख्त टिप्पणी
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अधिवक्ता आर.पी. सिंह की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने ही DM के पास शिकायत दर्ज कराई थी, जबकि उनका उस जमीन से कोई सीधा संबंध नहीं था। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि वकील ने अपने कानूनी ज्ञान का गलत इस्तेमाल किया और कंपनी को डराने और ब्लैकमेल करने की कोशिश की। कोर्ट ने आदेश दिया है कि जुर्माने की राशि छह हफ्ते के भीतर जमा करनी होगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
DM और ADM पर जुर्माना क्यों लगा?
अधिकारियों ने अपनी कानूनी सीमा से बाहर जाकर एक भूमि विवाद मामले में आदेश पारित किया और यूपी राजस्व संहिता के नियमों का उल्लंघन किया, जिससे याचिकाकर्ता को परेशानी हुई।
जुर्माने की राशि का भुगतान कैसे होगा?
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि 20-20 हजार रुपये का जुर्माना सरकारी खजाने से नहीं दिया जाएगा, बल्कि दोनों अधिकारियों को इसे अपने निजी बैंक खातों से छह सप्ताह के भीतर जमा करना होगा।