UP : लखनऊ में भारत की पहली पूरी तरह से डिजिटल जनगणना की प्रक्रिया शुरू हो गई है। 7 मई 2026 की सुबह 6 बजे से स्वगणना पोर्टल खोल दिया गया है। इस बार खास बात यह है कि मकान मालिकों के साथ-साथ किराएदार भी अपनी अलग आईडी बनाकर
UP : लखनऊ में भारत की पहली पूरी तरह से डिजिटल जनगणना की प्रक्रिया शुरू हो गई है। 7 मई 2026 की सुबह 6 बजे से स्वगणना पोर्टल खोल दिया गया है। इस बार खास बात यह है कि मकान मालिकों के साथ-साथ किराएदार भी अपनी अलग आईडी बनाकर अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे समावेशी विकास की नींव बताया है।
स्वगणना कैसे करें और क्या हैं जरूरी नियम
नागरिक se.census.gov.in पोर्टल पर जाकर अपनी जानकारी खुद भर सकते हैं। यह एक वैकल्पिक सुविधा है जो 21 मई 2026 तक उपलब्ध रहेगी। प्रक्रिया में कुल 34 प्रश्न पूछे जाएंगे, जिनमें आय से जुड़ा कोई सवाल नहीं होगा। फॉर्म भरने के बाद एक 11 अंकों की स्वगणना आईडी (SE ID) मिलेगी, जिसे बाद में सत्यापन के समय प्रगणकों को दिखाना होगा।
किराएदारों और आम जनता के लिए महत्वपूर्ण निर्देश
अगर एक मकान में एक से ज्यादा किराएदार रहते हैं, तो सभी के लिए अलग-अलग आईडी बनेंगी। प्रशासन ने साफ किया है कि इस प्रक्रिया में आधार नंबर, बैंक डिटेल या कोई अन्य दस्तावेज नहीं मांगा जाएगा। दी गई सभी जानकारी गोपनीय रहेगी और इसका नागरिकता से कोई लेना-देना नहीं है। सहायता के लिए टोल-फ्री नंबर 1855 जारी किया गया है।
जनगणना की पूरी समय-सारणी क्या है
लखनऊ और अन्य क्षेत्रों में जनगणना की प्रक्रिया चरणों में पूरी होगी। 7 से 21 मई तक लोग खुद पोर्टल पर जानकारी भर सकते हैं। इसके बाद 22 मई से 20 जून 2026 तक प्रगणक घर-घर जाकर सत्यापन करेंगे। व्यक्तिगत गणना का दूसरा चरण फरवरी 2027 में होगा और अंतिम गणना की तारीख 1 मार्च 2027 तय की गई है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या डिजिटल स्वगणना करना अनिवार्य है?
नहीं, स्वगणना एक वैकल्पिक सुविधा है। नागरिक अपनी सुविधा के अनुसार पोर्टल पर जानकारी भर सकते हैं, वरना प्रगणक घर आकर सत्यापन करेंगे।
क्या जनगणना कर्मी ओटीपी या आधार कार्ड मांगेंगे?
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनगणना कर्मी कभी भी ओटीपी नहीं मांगेंगे और न ही आधार या बैंक विवरण की जरूरत होगी। नागरिकों को प्रगणक का आईडी कार्ड जरूर देखना चाहिए।