Lucknow में अमेरिकंस से 200 करोड़ की ठगी, 7 साइबर अपराधी गिरफ्तार, Omaxe सोसाइटी में चल रहा था फर्जी कॉल सेंटर
Lucknow: राजधानी लखनऊ के गोमती नगर एक्सटेंशन इलाके में पुलिस ने एक बहुत बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड गिरोह का पर्दाफाश किया है। क्राइम ब्रांच और साइबर सेल की टीम ने मिलकर गुरुवार रात एक छापेमारी की, जिसमें सात लोगों को
Lucknow: राजधानी लखनऊ के गोमती नगर एक्सटेंशन इलाके में पुलिस ने एक बहुत बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड गिरोह का पर्दाफाश किया है। क्राइम ब्रांच और साइबर सेल की टीम ने मिलकर गुरुवार रात एक छापेमारी की, जिसमें सात लोगों को गिरफ्तार किया गया। यह गैंग पिछले आठ महीनों में अमेरिका के लोगों से करीब 200 करोड़ रुपये की ठगी कर चुका था। यह पूरा नेटवर्क सुशांत गोल्फ सिटी की Omaxe R-2 सोसाइटी के चार फ्लैटों से संचालित हो रहा था।
पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह ‘डिजिटल अरेस्ट’ के तरीके से ठगी करता था। गैंग के सदस्य अमेरिकी नागरिकों के कंप्यूटर में मैलवेयर भेजते थे, जिससे स्क्रीन पर फर्जी वायरस अलर्ट और टोल-फ्री नंबर दिखने लगते थे। जब पीड़ित उन नंबरों पर फोन करते थे, तो ठग खुद को माइक्रोसॉफ्ट सपोर्ट एग्जीक्यूटिव या फेडरल ट्रेड कमीशन (FTC) का अधिकारी बताते थे। वे लोगों को डराते थे कि उनका अकाउंट खतरे में है और फिर TeamViewer जैसे सॉफ्टवेयर के जरिए कंप्यूटर का रिमोट एक्सेस ले लेते थे।
डिप्टी कमिपर ऑफ पुलिस (क्राइम) अनिल यादव ने बताया कि यह सेटअप किसी ‘मिनी जामताड़ा’ जैसा था। ठग पीड़ितों से अमेजन और वॉलमार्ट के गिफ्ट कार्ड खरीदने को कहते थे या फिर बड़ी रकम के लिए कैश और सोना कूरियर से भेजने का दबाव बनाते थे। पकड़े गए आरोपियों में मुख्य मास्टरमाइंड पुनीत कुमार वर्मा (34) और डीपेन चंद्रकांत पटेल (41) शामिल हैं, जो अहमदाबाद के रहने वाले हैं। पुनीत का भाई यशचंद्र प्रकाश वर्मा भी इस नेटवर्क का हिस्सा बताया जा रहा है, जो अहमदाबाद और अमेरिका से इसे कंट्रोल कर रहा था।
पुलिस ने इस ऑपरेशन के दौरान काफी मात्रा में डिजिटल सामान जब्त किया है। बरामद सामान की लिस्ट नीचे दी गई है:
| जब्त सामान | संख्या |
|---|---|
| लैपटॉप | 8 |
| मोबाइल फोन | 9 |
| हेडसेट | 9 |
| वाई-फाई राउटर | 4 |
| कंप्यूटर माउस और चार्जर | कई |
ADCP (क्राइम) किरण यादव ने बताया कि इस गिरोह में उन लोगों को रखा गया था जिन्हें अंग्रेजी भाषा की अच्छी समझ थी और जिन्हें BPO का अनुभव था। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि इस गैंग का संबंध 1 जुलाई को समिट बिल्डिंग में पकड़े गए 119 साइबर अपराधियों से तो नहीं है। इस पूरे मामले में भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट की धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।