Lucknow में ठगी के तीसरे कॉल सेंटर का भंडाफोड़, अमेरिकी नागरिकों से 150 करोड़ की ठगी; 39 गिरफ्तार

Lucknow: यूपी की राजधानी लखनऊ में पुलिस ने ठगी करने वाले एक और बड़े कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है। विभूति खंड इलाके की साइबर हाइट्स बिल्डिंग के चौथे तल पर चल रहे इस सेंटर से अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा था। पु

Lucknow: यूपी की राजधानी लखनऊ में पुलिस ने ठगी करने वाले एक और बड़े कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है। विभूति खंड इलाके की साइबर हाइट्स बिल्डिंग के चौथे तल पर चल रहे इस सेंटर से अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा था। पुलिस की इस कार्रवाई में मास्टरमाइंड समेत 4 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 35 कॉल टेकर्स को हिरासत में लिया गया है।

यह पूरी कार्रवाई डीसीपी की क्राइम टीम और विभूति खंड पुलिस ने ‘ऑपरेशन साय-वज्र’ के तहत की है। पुलिस उपायुक्त (पूर्वी) डॉ. दीक्षा शर्मा ने बताया कि इस गिरोह ने पिछले छह महीनों में करीब 100 से 150 करोड़ रुपये की ठगी की है। जालसाज खुद को अमेरिकी फेडरल ट्रेड कमीशन (FTC) या अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का अधिकारी बताकर लोगों को डराते थे और उन्हें डिजिटल अरेस्ट की धमकी देते थे।

ठगी के लिए आरोपियों ने एप्पल कस्टमर सपोर्ट की एक फर्जी वेबसाइट बनाई थी, जिसका प्रचार गूगल एड्स के जरिए किया जाता था। जब अमेरिकी नागरिक मदद के लिए कॉल करते थे, तो VOIP तकनीक के जरिए उनकी कॉल सीधे लखनऊ के इस ऑफिस में आती थी। ठगी की रकम गिफ्ट कार्ड, सोना या कैश के रूप में ली जाती थी, जिसे बाद में हवाला के जरिए भारत लाया जाता था।

इस गिरोह का मास्टरमाइंड प्रतापगढ़ का रहने वाला सूरज त्रिपाठी है। उसके साथ उसके मामा राहुल त्रिपाठी, फुफेरा भाई विवेक पांडेय और मुंबई का तकनीकी एक्सपर्ट आकाश अरुण दत्ता उर्फ रिक्की शामिल थे। पुलिस ने मौके से काफी सामान बरामद किया है, जिसकी जानकारी नीचे दी गई है:

बरामद सामान संख्या/विवरण
लैपटॉप 31
मोबाइल फोन 14
नकद राशि 18.5 लाख रुपये
माउस और चार्जर 32 माउस, 35 चार्जर
अन्य हेडफोन, मास्टरमाइंड की कार और फर्जी वेबसाइट के प्रिंटआउट

डीसीपी (साइबर अपराध) अनिल यादव के मुताबिक, 1 जुलाई से अब तक लखनऊ में कुल तीन ऐसे कॉल सेंटरों का भंडाफोड़ हो चुका है, जिनमें से अब तक कुल 168 जालसाजों को गिरफ्तार किया गया है। हिरासत में लिए गए 35 कर्मचारियों में उत्तराखंड, नेपाल, मुंबई, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल के लोग शामिल हैं, जिनकी भूमिका की जांच की जा रही है।