Lucknow कोर्ट परिसर में दिल्ली के वकीलों और मुवक्किल की पिटाई, हाईकोर्ट ने गठित की विशेष पीठ
Lucknow: कैसरबाग स्थित जनपद न्यायालय परिसर में मंगलवार को दिल्ली से आए तीन वकीलों और उनके मुवक्किल के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। इस घटना ने न्यायिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है, जिसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट की ल
Lucknow: कैसरबाग स्थित जनपद न्यायालय परिसर में मंगलवार को दिल्ली से आए तीन वकीलों और उनके मुवक्किल के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। इस घटना ने न्यायिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है, जिसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने तुरंत संज्ञान लेते हुए एक विशेष खंडपीठ का गठन किया है।
यह पूरी घटना 21 जुलाई 2026 को हुई जब दिल्ली के अधिवक्ता अभिप्सा मोहंती, कोमल अग्रवाल और आशुतोष श्रीवास्तव अपने मुवक्किल मोहम्मद शाकिर के साथ एक दीवानी मामले में वकालतनामा दाखिल करने पहुंचे थे। आरोप है कि अधिवक्ता सौरभ कुमार वर्मा और उनके साथियों ने उन्हें अदालत में पेश होने से रोका और उनके साथ गाली-गलौज करते हुए मारपीट की। मुवक्किल मोहम्मद शाकिर को बुरी तरह पीटा गया और उन्हें बंधक बनाने का आरोप भी लगा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की विशेष पीठ बनाई गई। कोर्ट ने लखनऊ के पुलिस आयुक्त अमरेंद्र कुमार सेंगर और जिला जज को निर्देश दिया कि वे 22 जुलाई की सुबह सवा दस बजे तक अपनी व्यक्तिगत रिपोर्ट पेश करें। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो इसे केवल एक अपराध नहीं बल्कि न्याय प्रशासन में गंभीर हस्तक्षेप माना जाएगा जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट तक खबर पहुंची जब एक महिला वकील ने मुख्य न्यायाधीश से संपर्क कर अपनी और अपने मुवक्किल की पिटाई की शिकायत की। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें न्यायमूर्ति राजन रॉय से मिलने की सलाह दी। पुलिस आयुक्त ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बताया कि मोहम्मद शाकिर का मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा है और दूसरी तरफ से भी एक शिकायत मिली है। वहीं जिला जज ने सीसीटीवी फुटेज की जांच के बाद कुछ वकीलों की पहचान की पुष्टि की है।
वकीलों की सुरक्षा को लेकर देश में चर्चा तेज है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने ‘अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम’ का मसौदा तैयार किया है, जिसमें वकीलों या उनके परिवार को नुकसान पहुंचाने पर 5 साल की जेल और 10 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है। इसी दिशा में तेलंगाना राज्य ने मार्च 2026 में अधिवक्ता संरक्षण विधेयक पारित किया था और बार काउंसिल ने 20 जुलाई 2026 को नए संशोधन विधेयक का मसौदा पेश किया है।