Lucknow कोर्ट हमले के आरोपी वकीलों की तलाश में 10 टीमें तैनात, पड़ोसी जिलों में भी पुलिस की दबिश

Lucknow: लखनऊ सिविल कोर्ट परिसर में हुए हमले के बाद अब पुलिस एक्शन मोड में है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच की सख्ती के बाद आरोपी वकीलों को पकड़ने के लिए पुलिस की 10 टीमें बना दी गई हैं। ये टीमें न सिर्फ लखनऊ बल्कि सीत

Lucknow: लखनऊ सिविल कोर्ट परिसर में हुए हमले के बाद अब पुलिस एक्शन मोड में है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच की सख्ती के बाद आरोपी वकीलों को पकड़ने के लिए पुलिस की 10 टीमें बना दी गई हैं। ये टीमें न सिर्फ लखनऊ बल्कि सीतापुर, उन्नाव, हरदोई और बाराबंकी जैसे पड़ोसी जिलों में भी छापेमारी कर रही हैं।

यह पूरा मामला 21 जुलाई 2026 का है, जब कोर्ट परिसर में वादी मोहम्मद शाकिर और दिल्ली से आए कुछ वकीलों के साथ मारपीट की गई थी। हाईकोर्ट ने इस घटना का खुद संज्ञान लिया और जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की एक विशेष बेंच बनाई। कोर्ट ने साफ कहा कि न्याय देने वाली व्यवस्था पर कुछ लोगों का कब्जा नहीं चलने दिया जाएगा और वकीलों के वेश में छिपी काली भेड़ों की पहचान कर उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

अदालत ने चार मुख्य आरोपी वकीलों—सौरभ कुमार वर्मा, हर्षित पांडेय, यश पांडेय और अभय प्रताप वर्मा के लखनऊ की किसी भी अदालत में 24 अगस्त 2026 तक प्रवेश पर रोक लगा दी है। इनमें से सौरभ कुमार वर्मा ने सरेंडर कर दिया है, लेकिन बाकी तीन अभी भी फरार हैं। कोर्ट ने इन वकीलों की बैकग्राउंड जांच के लिए इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) को आदेश दिया है और उनसे पिछले 10 साल का इनकम टैक्स रिटर्न और संपत्ति का ब्योरा मांगा है।

राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि आरोपी सौरभ कुमार वर्मा के खिलाफ पहले से ही आठ आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिसे सुनकर हाईकोर्ट ने चिंता जताई। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज के जरिए उन 40-50 अज्ञात लोगों की पहचान कर रही है जिन्होंने हमले में हिस्सा लिया था। साथ ही, वकीलों की अराजकता की शिकायतों के लिए जेसीपी कानून-व्यवस्था के ऑफिस में एक स्पेशल सेल बनाया गया है, जिसकी जिम्मेदारी दारोगा रामेश्वर तिवारी को सौंपी गई है। इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 24 अगस्त 2026 को होगी।