UP : लखनऊ के गोमती नगर स्थित अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के प्रेक्षागृह में चबूतरा थियेटर फेस्टिवल के 10वें सीजन का आयोजन किया गया। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से मदर सेवा संस्थान ने इस कार्यक्रम की मेज
UP : लखनऊ के गोमती नगर स्थित अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के प्रेक्षागृह में चबूतरा थियेटर फेस्टिवल के 10वें सीजन का आयोजन किया गया। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से मदर सेवा संस्थान ने इस कार्यक्रम की मेजबानी की। फेस्टिवल के दूसरे दिन 12 जून को ‘वाइफोफोबिया’ नाटक का मंचन हुआ, जिसे देखने बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।
क्या है ‘वाइफोफोबिया’ नाटक की कहानी
यह नाटक वैवाहिक जीवन की जटिलताओं पर आधारित है। डॉ. राकेश ऋषभ ने इसे लिखा है और वरिष्ठ रंगकर्मी महेश चंद्र देवा ने इसका निर्देशन किया है। नाटक एक काल्पनिक मनोवैज्ञानिक स्थिति ‘वाइफोफोबिया’ के इर्द-गिर्द घूमता है, जिसका सीधा मतलब पत्नी का डर होता है। इस नाटक के जरिए घर-परिवार और रिश्तों की उलझनों को मंच पर उतारा गया।
चबूतरा फेस्टिवल और अन्य नाटकों की जानकारी
यह फेस्टिवल 11 जून से 13 जून 2026 तक चला, जिसमें हर दिन शाम 7:00 बजे नाटक पेश किए गए। आम जनता के लिए इसमें प्रवेश पूरी तरह मुफ्त रखा गया था। फेस्टिवल के पहले दिन ‘हमें नष्ट मत करो’ और ‘सुभागी’ नाटक का मंचन हुआ, जबकि समापन के दिन 13 जून को ‘सारा जहां हमारा है’ नाटक प्रस्तुत किया गया।
स्थानीय कलाकारों को मिला प्रशिक्षण
मदर सेवा संस्थान की अध्यक्ष किरन लता के नेतृत्व में इस फेस्टिवल से पहले ‘नाद प्रवाह’ नाम की एक कार्यशाला भी आयोजित की गई। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के साथ मिलकर चलाई गई इस 15 दिनों की ट्रेनिंग में 20 स्थानीय बच्चों ने हिस्सा लिया। महेश चंद्र देवा ने मुख्य प्रशिक्षक के तौर पर बच्चों को रंगमंच की बारीकियां सिखाईं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
चबूतरा थियेटर फेस्टिवल का आयोजन कहाँ और कब हुआ
यह फेस्टिवल 11 से 13 जून 2026 तक लखनऊ के गोमती नगर स्थित अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के प्रेक्षागृह में आयोजित किया गया था।
वाइफोफोबिया नाटक का मुख्य विषय क्या था
यह नाटक वैवाहिक जीवन की मुश्किलों और ‘पत्नी के डर’ नामक एक काल्पनिक मनोवैज्ञानिक स्थिति पर आधारित था।