Lucknow में मेयर के खिलाफ भाजपा पार्षदों की बगावत, 45 पार्षदों को ‘जीरो बजट’ देने का आरोप
Lucknow: राजधानी लखनऊ में नगर निगम के अंदर सियासी घमासान मच गया है। भाजपा मेयर सुषमा खर्कवाल के खिलाफ उनके अपने ही दल के पार्षदों ने मोर्चा खोल दिया है। बजट आवंटन में भेदभाव के आरोप लगाते हुए 11 पार्षदों ने खुली बगावत कर
Lucknow: राजधानी लखनऊ में नगर निगम के अंदर सियासी घमासान मच गया है। भाजपा मेयर सुषमा खर्कवाल के खिलाफ उनके अपने ही दल के पार्षदों ने मोर्चा खोल दिया है। बजट आवंटन में भेदभाव के आरोप लगाते हुए 11 पार्षदों ने खुली बगावत कर दी है, जिससे पार्टी के भीतर तनाव बढ़ गया है।
विवाद की मुख्य वजह अवस्थापना निधि और 15वें वित्त आयोग की धनराशि का बंटवारा है। पार्षदों का आरोप है कि मेयर केवल अपने करीबी लोगों के वार्डों में विकास कार्य करा रही हैं। दावा किया गया है कि करीब 45 पार्षदों के वार्डों के लिए ‘जीरो बजट’ रखा गया है, जिसकी वजह से आम जनता के लिए बुनियादी सुविधाएं और विकास कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं।
यह मामला अब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच चुका है। जुलाई 2026 के अंत में 36 भाजपा पार्षदों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर समाधान न होने पर इस्तीफे की चेतावनी दी थी। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने भी 32 पार्षदों की शिकायत सुनी थी और उन्हें समान बजट का भरोसा दिया था।
इस विवाद में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का नाम भी जुड़ा है। पार्षदों ने आरोप लगाया कि राजनाथ सिंह के संसदीय क्षेत्र के 88 वार्डों को केवल 18 करोड़ रुपये मिले हैं, जबकि समाजवादी पार्टी के सांसद आर.के. चौधरी के मोहनलालगंज क्षेत्र के 22 वार्डों के लिए 32 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। हालांकि, मेयर ने 4 अगस्त को दिल्ली में राजनाथ सिंह से मुलाकात की थी, जिसमें विकास कार्यों पर चर्चा हुई थी।
ताजा घटनाक्रम में 8 अगस्त को महानगर भाजपा अध्यक्ष आनंद द्विवेदी को पार्षद सुशील तिवारी ने एक बंद लिफाफा सौंपा, जिसमें पार्षदों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की गई थी। दूसरी तरफ, मेयर सुषमा खर्कवाल ने संगठन को कोई पत्र भेजने से इनकार किया है, जबकि उनके कार्यालय से पत्र भेजे जाने का दावा किया जा रहा है। इस बगावत में पार्षद दल के उपनेता देव शर्मा, मुन्ना मिश्रा और मुख्य सचेतक मुकेश सिंह ‘मोटी’ जैसे नाम शामिल हैं।