Lucknow में जाली नोट तस्करी के दो दोषियों को 6-6 साल की सजा, पाकिस्तान और बांग्लादेश से जुड़ा था नेटवर्क
Lucknow: राजधानी की एक विशेष ATS अदालत ने जाली नोटों के कारोबार में शामिल दो तस्करों को कड़ी सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों दोषियों को 6-6 साल के कठोर कारावास की सजा दी है और साथ ही उन पर 60-60 हजार रुपये का जुर्माना भी लग
Lucknow: राजधानी की एक विशेष ATS अदालत ने जाली नोटों के कारोबार में शामिल दो तस्करों को कड़ी सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों दोषियों को 6-6 साल के कठोर कारावास की सजा दी है और साथ ही उन पर 60-60 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह मामला साल 2020 का है जब इन लोगों को भारी मात्रा में हाई क्वालिटी नकली नोटों के साथ पकड़ा गया था।
एटीएस की जांच में सामने आया कि यह पूरा नेटवर्क पाकिस्तान और बांग्लादेश से जुड़ा हुआ था। गिरफ्तार किए गए तस्करों के पास से उस समय 5.97 लाख रुपये के हाई क्वालिटी नकली भारतीय नोट बरामद हुए थे। इस कार्रवाई को सीमा पार से होने वाली जाली नोटों की तस्करी के खिलाफ एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।
नकली नोटों के खिलाफ यूपी एटीएस और पुलिस लगातार अभियान चला रही है। हाल ही में 3 जुलाई 2026 को एटीएस ने पश्चिम बंगाल के मालदा से जाकिर नाम के एक बड़े सप्लायर को गिरफ्तार किया है। जाकिर बांग्लादेश से आने वाले जाली नोटों को उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में बांटने का काम करता था। वह वाराणसी के सारनाथ थाने में दर्ज एक मामले में वांछित था और उस पर 25 हजार रुपये का इनाम भी था।
लखनऊ में भी पुलिस ने नकली नोटों के खिलाफ कई गिरफ्तारियां की हैं। 15 जुलाई 2026 को दुबग्गा पुलिस ने सुधीर यादव को पकड़ा, जबकि इससे पहले 11 जुलाई को संजीव कुमार मिश्रा को गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा, 10 जून 2026 को लखनऊ पुलिस ने एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए आजमगढ़ के तीन लोगों को गिरफ्तार किया और उनके पास से करीब 14 लाख रुपये के नकली नोट बरामद किए।
एटीएस के अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों से पूछताछ जारी है ताकि इस सिंडिकेट के अन्य सदस्यों और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पता लगाया जा सके। लखनऊ कमिश्नरेट पुलिस ने भी साफ किया है कि जाली नोटों के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।