Lucknow अग्निकांड में बड़ा खुलासा, फर्जी NOC से लिया गया था बिजली कनेक्शन; मालिक समेत कई गिरफ्तार
Lucknow: अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड के मामले में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। विद्युत सुरक्षा निदेशालय की जांच में सामने आया है कि जिस इमारत में आग लगी थी, उसका कमर्शियल बिजली कनेक्शन पूरी तरह फर्जी अनापत्ति प्रमाण
Lucknow: अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड के मामले में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। विद्युत सुरक्षा निदेशालय की जांच में सामने आया है कि जिस इमारत में आग लगी थी, उसका कमर्शियल बिजली कनेक्शन पूरी तरह फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) के जरिए लिया गया था। विभाग के रिकॉर्ड में भवन मालिक वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला के नाम पर कोई NOC जारी ही नहीं की गई थी।
विद्युत सुरक्षा निदेशक गिरीश कुमार सिंह ने बताया कि जांच के दौरान पता चला कि जिस NOC नंबर का इस्तेमाल कनेक्शन लेने के लिए किया गया था, वह असल में किसी दूसरे संस्थान को दिया गया था। साथ ही, कागजों पर किए गए हस्ताक्षर भी जाली पाए गए। इस खुलासे के बाद अब यह आशंका बढ़ गई है कि शहर और प्रदेश के अन्य व्यावसायिक भवनों में भी इसी तरह के फर्जी कागजों का खेल चल रहा है। अनुमान है कि करीब 25 प्रतिशत कमर्शियल कनेक्शन फर्जी NOC के जरिए लिए गए हो सकते हैं।
जांच में यह भी पाया गया कि इमारत में बिजली का लोड स्वीकृत 20 किलोवाट से कहीं ज्यादा था। जून 2026 तक यह लोड बढ़कर 34.5 किलोवाट हो गया था, जिसकी वजह से MCB बार-बार ट्रिप हो रहा था, लेकिन इसे नजरअंदाज किया गया। वहीं अग्निशमन विभाग के अनुसार, पिछले 13 सालों में मालिक ने अग्नि सुरक्षा NOC के लिए कोई संपर्क नहीं किया था। हालांकि, इमारत की ऊंचाई और क्षेत्र के हिसाब से वह NBC नियमों के दायरे में नहीं थी, फिर भी बिजली कनेक्शन के लिए फर्जीवाड़ा किया गया।
इस पूरे मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो सदस्यीय SIT का गठन किया है, जिसमें अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और ADG प्रवीण कुमार शामिल हैं। SIT को 7 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी होगी। प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए भवन मालिक वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, उनके भाइयों और कोचिंग व एनिमेशन स्टूडियो चलाने वाले तुषांक कृष्ण जायसवाल, रामकृष्ण उपाध्याय और सुरेश कुमार शाहु को गिरफ्तार कर लिया है। इन सभी पर गैर-इरादतन हत्या और धोखाधड़ी की धाराएं लगाई गई हैं।
लापरवाही के आरोप में लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने अपने तीन जूनियर इंजीनियरों को सस्पेंड कर दिया है। वहीं बिजली विभाग के कुछ कार्यकारी इंजीनियर (XEN) भी जांच के घेरे में हैं। इस घटना के बाद पूरे प्रदेश में अभियान चलाया गया है, जिसके तहत लखनऊ में 71 व्यावसायिक भवनों को सील किया गया और 83 को नोटिस भेजे गए। पूरे उत्तर प्रदेश में अब तक 100 से ज्यादा संस्थानों पर कार्रवाई की गई है।