Lucknow की 9 विधानसभा सीटों का गणित, 2027 चुनाव से पहले बदला राजनीतिक समीकरण
UP/Lucknow: राजधानी लखनऊ की सियासत एक बार फिर गरमाने लगी है। फरवरी-मार्च 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए राजनीतिक पार्टियां अभी से अपनी बिसात बिछाने में जुट गई हैं। पिछले तीन दशकों से भाजपा का मजबूत किला रही ल
UP/Lucknow: राजधानी लखनऊ की सियासत एक बार फिर गरमाने लगी है। फरवरी-मार्च 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए राजनीतिक पार्टियां अभी से अपनी बिसात बिछाने में जुट गई हैं। पिछले तीन दशकों से भाजपा का मजबूत किला रही लखनऊ की नौ सीटों पर अब समाजवादी पार्टी और INDIA गठबंधन कड़ी चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।
2022 के चुनाव परिणामों पर नजर डालें तो लखनऊ की 9 सीटों में से 7 पर भाजपा ने कब्जा जमाया था, जबकि समाजवादी पार्टी ने 2 सीटों पर जीत हासिल की थी। 2017 में भाजपा ने यहां 8 सीटें जीती थीं, जिसे देखते हुए 2022 में सपा की वापसी को महत्वपूर्ण माना गया। हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद समीकरण बदले हैं और अब मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।
| विधानसभा सीट | 2022 विजेता (पार्टी) | मुख्य प्रतिद्वंदी (पार्टी) | जीत का अंतर / विवरण |
|---|---|---|---|
| मलिहाबाद | जयदेवी (भाजपा) | सोनू कनौजिया (सपा) | 7,745 वोट (कम अंतर) |
| बख्शी का तालाब (BKT) | योगेश शुक्ला (भाजपा) | गोमती यादव (सपा) | 27,788 वोट |
| लखनऊ उत्तर | डॉ. नीरज बोरा (भाजपा) | पूजा शुक्ला (सपा) | 12.1% अंतर (48.3% वोट शेयर) |
| लखनऊ मध्य | बृजेश पाठक (भाजपा) | – | 2.6% अंतर (40.2% वोट शेयर) |
| लखनऊ पूर्व | ओ.पी. श्रीवास्तव (भाजपा) | अनुराग सिंह भदौरिया (सपा) | 1,52,928 वोट |
| सरोजिनी नगर | भाजपा | – | भाजपा ने जीत दर्ज की |
भाजपा नेतृत्व ने 2024 के लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन की समीक्षा के बाद 3-4 जुलाई 2026 को लखनऊ का दौरा किया। पार्टी का मुख्य फोकस उन सीटों पर है जहां जीत का अंतर बहुत कम था या जहां पार्टी चुनाव हारी थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद विकास परियोजनाओं और स्थानीय नेताओं के जरिए कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर रहे हैं।
दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी अपनी ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति के दम पर वोट बैंक बढ़ाने की कोशिश कर रही है। 2024 में सपा और कांग्रेस की साझेदारी ने 2027 के लिए एक मजबूत संकेत दिया है। वहीं, मतदाता पहचान प्रक्रिया (SIR) के कारण करीब 2.04 करोड़ मतदाताओं की कमी आई है, जिसमें महिला मतदाताओं की संख्या काफी है। इस बदलाव से उन 49 सीटों पर बड़ा असर पड़ सकता है जहां पिछली बार जीत-हार का अंतर 5,000 वोटों से कम था।