UP : लखनऊ में 69000 शिक्षक भर्ती के इंतजार में बैठे अभ्यर्थियों का गुस्सा फूट पड़ा है। रविवार को सैकड़ों उम्मीदवारों ने सड़क पर कीड़े-मकौड़ों की तरह रेंगकर बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास का घेराव किया। प्रदर्शनका
UP : लखनऊ में 69000 शिक्षक भर्ती के इंतजार में बैठे अभ्यर्थियों का गुस्सा फूट पड़ा है। रविवार को सैकड़ों उम्मीदवारों ने सड़क पर कीड़े-मकौड़ों की तरह रेंगकर बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने ‘योगी बाबा न्याय करो और सुप्रीम कोर्ट में पैरवी करो’ के नारे लगाकर अपनी नाराजगी जाहिर की।
अभ्यर्थियों ने क्यों किया ऐसा प्रदर्शन?
प्रदर्शन कर रहे युवाओं का कहना है कि नियुक्ति प्रक्रिया में हो रही देरी की वजह से उनकी हालत कीड़े-मकौड़ों जैसी हो गई है। उनका आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार की पैरवी कमजोर है, जिसकी वजह से मामला लंबा खिंच रहा है और उन्हें अब तक जॉइनिंग नहीं मिली। सुशील गुप्ता, धनंजय गुप्ता और भास्कर सिंह जैसे नेताओं के नेतृत्व में अभ्यर्थियों ने आरक्षण नियमों में गड़बड़ी का भी आरोप लगाया है।
अब तक क्या हुआ मामला और क्या है विवाद?
यह भर्ती प्रक्रिया साल 2019 में शुरू हुई थी, लेकिन आरक्षण नियमों के उल्लंघन को लेकर विवाद बढ़ गया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जून 2020 और जनवरी 2022 की चयन सूचियों को रद्द करते हुए सरकार को नई लिस्ट जारी करने को कहा था। यह मामला 2024 से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। अभ्यर्थियों का दावा है कि नेशनल बैकवर्ड क्लासेस कमीशन (NCBC) ने भी उनकी मांगों का समर्थन किया है।
आगे की चेतावनी और पुलिस की कार्रवाई
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो वे मुख्यमंत्री आवास और कार्यालय का घेराव करेंगे। विरोध प्रदर्शन के दौरान मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा और कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 19 मई या 31 मई 2026 को होने की संभावना है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
69000 शिक्षक भर्ती का विवाद क्या है?
यह विवाद 2019 में शुरू हुई भर्ती में आरक्षण नियमों के गलत कार्यान्वयन और बेसिक शिक्षा नियम 1981 के उल्लंघन को लेकर है, जिसके कारण इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चयन सूचियां रद्द कर दी थीं।
प्रदर्शनकारी सरकार से क्या मांग कर रहे हैं?
अभ्यर्थियों की मांग है कि राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में मजबूती से पैरवी करे ताकि कानूनी अड़चनें दूर हों और उन्हें जल्द से जल्द नियुक्ति मिल सके।