Delhi: भगवान बुद्ध के मुख्य शिष्यों, अर्हंत सारिपुत्र और अर्हंत मौद्गल्यायन के पवित्र अवशेष मंगोलिया की राजधानी उलानबटोर से वापस दिल्ली पहुंच गए हैं। ये अवशेष 11 जून 2026 को भारत लौटे। मंगोलिया में वेसाक उत्सव के मौके पर
Delhi: भगवान बुद्ध के मुख्य शिष्यों, अर्हंत सारिपुत्र और अर्हंत मौद्गल्यायन के पवित्र अवशेष मंगोलिया की राजधानी उलानबटोर से वापस दिल्ली पहुंच गए हैं। ये अवशेष 11 जून 2026 को भारत लौटे। मंगोलिया में वेसाक उत्सव के मौके पर इन अवशेषों की 10 दिनों तक प्रदर्शनी लगाई गई थी, जिसे देखने बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे।
अवशेषों को कैसे लाया गया और क्या था प्रोटोकॉल
इन पवित्र अवशेषों को मंगोलिया से दिल्ली लाने के लिए भारतीय वायु सेना (IAF) के विशेष विमान IL-76 का इस्तेमाल किया गया, जिसे गजराज भी कहा जाता है। यात्रा के दौरान इन अवशेषों को किसी देश के राष्ट्राध्यक्ष (Head of State) जैसा प्रोटोकॉल और सुरक्षा दी गई थी। लद्दाख के उपराज्यपाल (LG) विनय कुमार सक्सेना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया और अवशेषों को सुरक्षित भारत वापस लाए।
मंगोलिया में प्रदर्शनी और दोनों देशों के संबंध
इन अवशेषों को 30 मई 2026 को भारत से मंगोलिया भेजा गया था। वहां उलानबटोर के गंदंतेंगचेलिंग मठ में 31 मई से 9 जून 2026 तक प्रदर्शनी चली। इस पहल की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अक्टूबर 2025 में मंगोलियाई राष्ट्रपति खुरेलसुख उखना की भारत यात्रा के दौरान की थी। LG विनय कुमार सक्सेना ने इसे दो प्राचीन सभ्यताओं को जोड़ने वाला एक आध्यात्मिक पुल बताया।
कौन-कौन से अधिकारी और संस्थाएं शामिल रहीं
अवशेषों को मंगोलिया ले जाने वाले दल का नेतृत्व असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने किया था। इस पूरी प्रक्रिया में भारत का संस्कृति मंत्रालय, प्रधानमंत्री कार्यालय, नेशनल म्यूजियम ऑफ इंडिया और मंगोलिया सरकार की अहम भूमिका रही। बता दें कि ये पवित्र अवशेष मध्य प्रदेश के सांची में सुरक्षित रखे गए हैं, जिसके कारण इस आयोजन का संबंध MP से भी है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
भगवान बुद्ध के किन शिष्यों के अवशेष मंगोलिया ले जाए गए थे
भगवान बुद्ध के दो मुख्य शिष्यों, अर्हंत सारिपुत्र और अर्हंत मौद्गल्यायन के पवित्र अवशेषों को मंगोलिया ले जाया गया था।
मंगोलिया में प्रदर्शनी कब से कब तक चली
उलानबटोर के गंदंतेंगचेलिंग मठ में यह प्रदर्शनी 31 मई से 9 जून 2026 तक आयोजित की गई थी।