Maharashtra: लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और उनके परिसीमन (Delimitation) को लेकर देश में राजनीतिक बहस छिड़ गई है। Shiv Sena (UBT) के सांसद Sanjay Raut ने इस प्रक्रिया को विवादित बताया है। उनका कहना है कि बिना नई जनगणना
Maharashtra: लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और उनके परिसीमन (Delimitation) को लेकर देश में राजनीतिक बहस छिड़ गई है। Shiv Sena (UBT) के सांसद Sanjay Raut ने इस प्रक्रिया को विवादित बताया है। उनका कहना है कि बिना नई जनगणना (Census) कराए सीटों का निर्धारण करना गलत है, जिससे देश में गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है।
परिसीमन को लेकर क्या है विवाद और किसका क्या कहना है?
Sanjay Raut ने साफ किया कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण का समर्थन करती है, लेकिन परिसीमन के तरीके का विरोध करती है। वहीं, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री M.K. Stalin ने इसे दक्षिणी राज्यों के साथ एक ऐतिहासिक अन्याय बताया है। तेलंगाना के मुख्यमंत्री Revanth Reddy और कांग्रेस सांसद Jairam Ramesh ने भी चिंता जताई है कि परिवार नियोजन में सफल रहे राज्यों को कम प्रतिनिधित्व देकर सजा दी जा रही है।
सरकार के नए बिल और सीटों की संख्या में बदलाव
केंद्र सरकार ने परिसीमन के लिए तीन महत्वपूर्ण बिल पेश किए हैं, जिन पर 16 से 18 अप्रैल 2026 तक संसद के विशेष सत्र में चर्चा होगी। इन बदलावों की मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
| बिल का नाम |
मुख्य प्रस्ताव |
| Constitution (131st Amendment) Bill, 2026 |
लोकसभा सीटें 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 करना और 2011 की जनगणना का उपयोग करना। |
| Delimitation Bill, 2026 |
Delimitation Act, 2002 को बदलना और एक नया आयोग बनाना जिसका फैसला अंतिम होगा। |
| Union Territories Laws (Amendment) Bill, 2026 |
दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी के नियमों को नए परिसीमन के अनुसार बदलना। |
आम जनता और राज्यों पर इसका क्या असर होगा?
इस प्रक्रिया से अलग-अलग राज्यों की राजनीतिक ताकत बदल सकती है। सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आश्वासन दिया है कि परिसीमन के बाद सभी राज्यों की लोकसभा सीटें लगभग 50% बढ़ेंगी और किसी भी राज्य की वर्तमान ताकत कम नहीं होगी। हालांकि, विपक्षी दल और विशेषकर दक्षिणी राज्य इस बात से डरे हुए हैं कि पुरानी जनगणना के आधार पर उनके प्रतिनिधित्व में कमी आ सकती है।