Kishanganj में ग्रामीणों को अब स्थानीय स्तर पर मिलेंगी 151 दवाएं और 14 तरह की जांच सुविधाएं

Kishanganj: बिहार के किशनगंज जिले में ग्रामीण इलाकों की स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए बड़े कदम उठाए गए हैं। अब गांव के लोगों को छोटी-छोटी जांच और दवाइयों के लिए शहर नहीं दौड़ना पड़ेगा। स्थानीय स्तर पर ही 14 तर

Kishanganj: बिहार के किशनगंज जिले में ग्रामीण इलाकों की स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए बड़े कदम उठाए गए हैं। अब गांव के लोगों को छोटी-छोटी जांच और दवाइयों के लिए शहर नहीं दौड़ना पड़ेगा। स्थानीय स्तर पर ही 14 तरह की जांच और 151 तरह की दवाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे मरीजों के समय और पैसे दोनों की बचत होगी।

स्वास्थ्य विभाग का मुख्य उद्देश्य बीमारी की पहचान, जांच और इलाज को गांव के करीब लाना है। इसके लिए आयुष्मान आरोग्य मंदिर (जो पहले हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर थे) के जरिए प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं दी जा रही हैं। जन आरोग्य समितियां गांव की स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने में मदद कर रही हैं, जिससे अब लोगों को इलाज के लिए ज्यादा आर्थिक खर्च नहीं करना पड़ रहा है। ठाकुरगंज के भोगदबार स्थित एक केंद्र को 86.21% स्कोर के साथ नेशनल क्वालिटी सर्टिफिकेशन भी मिला है।

जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को और आधुनिक बनाने के लिए मुख्यमंत्री के सात निश्चय-3 योजना के तहत छह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) को मॉडल हेल्थ सेंटर में बदला जा रहा है। इनमें ठाकुरगंज, बहादुरगंज, दिघलबंक, टेरधागछ, कोचाधामन और पोठिया शामिल हैं। यहां आधुनिक लेबर रूम और ऑपरेशन थिएटर बनाए जाएंगे ताकि सुरक्षित डिलीवरी और गंभीर बीमारियों का इलाज स्थानीय स्तर पर ही हो सके।

गरीब मरीजों के लिए सदर अस्पताल किशनगंज में PPP मॉडल के तहत CT स्कैन की सुविधा दी जा रही है। आंकड़ों के अनुसार, साल 2020-21 में जहां केवल 790 CT स्कैन हुए थे, वहीं 2025-26 तक यह संख्या बढ़कर 8,802 हो गई है। साथ ही, आयुष्मान भारत कार्ड बनाने के लिए विशेष अभियान चलाया गया ताकि पात्र लोग सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में मुफ्त इलाज पा सकें।

हर महीने की 12 से 14 तारीख के बीच आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में स्वास्थ्य मेले लगाए जाते हैं, जहां ग्रामीणों की जांच और परामर्श किया जाता है। इसके अलावा, बच्चों में गंभीर बीमारियों की पहचान के लिए RBSK के जरिए इलाज की व्यवस्था है, जिसके तहत हाल ही में दो बच्चों को बेहतर इलाज के लिए पटना के IGIMS भेजा गया है। नवजात शिशुओं के लिए विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान काउंसलिंग और होम विजिट भी की जा रही है।