Delhi में छात्र प्रदर्शन रोकने के लिए Kiran Bedi का सुझाव, पुलिस की जगह Civil Defence Volunteers को तैनात करने की मांग

Delhi: NEET पेपर लीक को लेकर हो रहे छात्र प्रदर्शनों के बीच पूर्व IPS अधिकारी Kiran Bedi ने एक नया सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि छात्रों और पुलिस के बीच सीधी भिड़ंत को रोकने के लिए Civil Defence Volunteers (CDVs) को पहल

Delhi: NEET पेपर लीक को लेकर हो रहे छात्र प्रदर्शनों के बीच पूर्व IPS अधिकारी Kiran Bedi ने एक नया सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि छात्रों और पुलिस के बीच सीधी भिड़ंत को रोकने के लिए Civil Defence Volunteers (CDVs) को पहली लाइन में तैनात किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि इससे पुलिस पर बर्बरता के आरोप कम लगेंगे और सरकारी संपत्ति का नुकसान भी नहीं होगा।

Kiran Bedi ने गुरुवार, 23 जुलाई 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो शेयर कर यह बात कही। उन्होंने सुझाव दिया कि इन वॉलंटियर्स को हेलमेट, बॉडी आर्मर और केन शील्ड जैसे सुरक्षा उपकरण दिए जाएं, लेकिन उनके पास लाठी नहीं होनी चाहिए। Riot Police को रिजर्व में रखा जाए और वे तभी आगे आएं जब स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाए या जान-माल को खतरा हो। उन्होंने इस मॉडल की तुलना बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) के काम करने के तरीके से की और गृह मंत्री अमित शाह, PMO और दिल्ली पुलिस को टैग कर यह प्रस्ताव भेजा।

यह सुझाव ऐसे समय में आया है जब 20 जुलाई को Cockroach Janta Party (CJP) के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस की कार्यशैली की काफी आलोचना हुई थी। दूसरी तरफ, केंद्र सरकार ने CJP के साथ बातचीत के संकेत दिए हैं, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है और 24 जुलाई को पुलिस बर्बरता के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने भी इस मामले में जनहित याचिका पर 24 जुलाई को सुनवाई करने का फैसला किया है।

इस बीच, महाराष्ट्र के मुंबई में भी CJP के विरोध प्रदर्शनों को लेकर सख्ती बढ़ गई है। मुंबई पुलिस ने 23 जुलाई से 6 अगस्त तक धारा 144 जैसी पाबंदियां लगा दी हैं, जिसके तहत पांच या उससे ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने और लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर रोक है। 23 जुलाई को बिना अनुमति प्रदर्शन करने के आरोप में 100 से ज्यादा युवाओं को हिरासत में लिया गया। वहीं, मुंबई BJP अध्यक्ष अमित सतम ने आरोप लगाया कि विदेशी ताकतें और विपक्षी दल देश की आर्थिक प्रगति को रोकने के लिए इस आंदोलन को हवा दे रहे हैं।