UP : लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में दवाओं की खरीद में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। यूरोलॉजी विभाग में असाध्य योजना के तहत करीब 2.25 करोड़ से 3 करोड़ रुपये की धांधली हुई है। हैरान करने वाली बात यह है
UP : लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में दवाओं की खरीद में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। यूरोलॉजी विभाग में असाध्य योजना के तहत करीब 2.25 करोड़ से 3 करोड़ रुपये की धांधली हुई है। हैरान करने वाली बात यह है कि जिन मरीजों की मौत हो चुकी थी, उनके नाम पर भी महंगी दवाएं खरीदी गईं। अब प्रशासन दोषियों को नौकरी से निकालने और उन पर मुकदमा दर्ज करने की तैयारी में है।
घोटाला कैसे हुआ और क्या है पूरा मामला?
KGMU के यूरोलॉजी विभाग में गरीबों के मुफ्त इलाज के लिए चलने वाली असाध्य योजना में गड़बड़ी पाई गई। जांच में पता चला कि कुछ महंगे इंजेक्शन, जो छह महीने में सिर्फ एक बार दिए जाने थे, उन्हें कागजों पर एक ही महीने में 4 से 5 बार दिया गया। इन इंजेक्शनों की कीमत 8,000 से 10,000 रुपये प्रति डोज थी। कई ऐसे मामले भी मिले जहां मरीजों को अस्पताल में भर्ती किए बिना ही दवाओं का इस्तेमाल दिखाया गया।
अधिकारियों को शक कैसे हुआ और क्या कार्रवाई हुई?
दवाओं के खर्च में अचानक आई बढ़ोत्तरी ने इस घोटाले का पर्दाफाश किया। अक्टूबर-नवंबर 2025 में दवाओं का खर्च 10 लाख रुपये महीना था, जो फरवरी 2026 तक 40 लाख और मार्च 2026 में 45 लाख रुपये से ज्यादा हो गया। कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने तुरंत डीन पैरामेडिकल डॉ. केके सिंह की अध्यक्षता में पांच सदस्यों की कमेटी बनाई। प्रशासन ने फिलहाल सभी संदिग्ध बिलों के भुगतान पर रोक लगा दी है।
किन लोगों पर गिरेगी गाज और आगे क्या होगा?
जांच रिपोर्ट के आधार पर एक नियमित फार्मासिस्ट और तीन संविदा कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की गई है। इसके अलावा चीफ फार्मासिस्ट और एक डॉक्टर पर भी गाज गिर सकती है। दवा बांटने वाले संविदाकर्मियों को काउंटर से हटाकर विभागाध्यक्ष कार्यालय से जोड़ दिया गया है और उन्हें लखनऊ छोड़ने से मना किया गया है। मंगलवार (2 जून 2026) को दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज होगी और उनसे पैसों की वसूली की जाएगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
KGMU में दवाओं का घोटाला कितने रुपयों का है?
यूरोलॉजी विभाग में असाध्य योजना के तहत 2.25 करोड़ रुपये से लेकर 3 करोड़ रुपये तक की दवाओं की खरीद में अनियमितताएं पाई गई हैं।
दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जा रही है?
प्रशासन दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज कराएगा, उन्हें सेवा से बर्खास्त किया जाएगा और घोटाले की रकम की रिकवरी की जाएगी।