UP : लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) परिसर में बने 6 अवैध मजारों को अब हटाया जाएगा। प्रशासन ने इन मजारों की देखरेख करने वालों को नोटिस दिया था, जिसकी समय सीमा अब पूरी हो चुकी है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इन्हे
UP : लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) परिसर में बने 6 अवैध मजारों को अब हटाया जाएगा। प्रशासन ने इन मजारों की देखरेख करने वालों को नोटिस दिया था, जिसकी समय सीमा अब पूरी हो चुकी है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इन्हें लावारिस घोषित कर दिया है और अब इन्हें गिराने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस से मदद मांगी गई है।
इन मजारों को हटाने की जरूरत क्यों पड़ी
KGMU के प्रवक्ता प्रो. केके सिंह ने बताया कि अस्पताल परिसर में इन मजारों की वजह से काफी भीड़ जमा होती है। इससे मरीजों और डॉक्टरों की आवाजाही में दिक्कत आती है और अस्पताल के माहौल में अशांति फैलती है। साथ ही, यहां साफ-सफाई और सुरक्षा को लेकर भी कई समस्याएं बनी रहती हैं। प्रशासन का कहना है कि यूनिवर्सिटी की जमीन का इस्तेमाल सिर्फ पढ़ाई और इलाज के लिए होना चाहिए, किसी अनधिकृत निर्माण के लिए नहीं।
किन जगहों पर हुई है पहचान और क्या है नियम
अवैध मजारों को क्वीनमैरी अस्पताल, माइक्रोबायोलॉजी विभाग, न्यू बॉयज हॉस्टल, रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग और शताब्दी फेज-2 में चिन्हित किया गया है। इन जगहों पर भविष्य में पार्किंग और अन्य शैक्षणिक सुविधाएं बढ़ानी हैं। प्रो. सिंह के मुताबिक, मजारों के संबंध में तीन बार नोटिस भेजे गए थे, लेकिन किसी ने भी कोई वैध दस्तावेज पेश नहीं किया। यह पूरी कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर की जा रही है।
विरोध और अन्य पक्ष क्या कहते हैं
इस कार्रवाई का विरोध भी हो रहा है। मौलाना फिरंगी महली और ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास का कहना है कि ये मजारें KGMU के बनने से पहले से वहां मौजूद हैं, इसलिए इन्हें नहीं हटाया जाना चाहिए। वहीं, विश्व हिंदू परिषद (VHP) और कुछ भाजपा नेता पहले से ही इन अवैध निर्माणों को हटाने की मांग कर रहे थे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
KGMU में कितनी मजारों को हटाया जा रहा है और क्यों
कुल 6 अवैध मजारों को हटाया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि इनसे अस्पताल में भीड़ बढ़ती है, आवाजाही बाधित होती है और जमीन की जरूरत पार्किंग व अन्य सुविधाओं के विस्तार के लिए है।
क्या मजारों के मालिकों को मौका दिया गया था
हाँ, KGMU प्रशासन के अनुसार मजारों की देखरेख करने वालों को तीन बार नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन किसी ने भी कोई वैध दस्तावेज या जवाब पेश नहीं किया।