Lucknow के KGMU में शुरू हुआ UP का पहला बोन-टिश्यू बैंक, अब हड्डियों और स्पाइन की सर्जरी होगी आसान
Lucknow: किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के ऑर्थोपेडिक्स डिपार्टमेंट में उत्तर प्रदेश का पहला बोन-टिश्यू बैंक शुरू हो गया है। यह सुविधा उन मरीजों के लिए बहुत मददगार होगी जिन्हें हड्डी या स्पाइन की गंभीर सर्जरी करानी
Lucknow: किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के ऑर्थोपेडिक्स डिपार्टमेंट में उत्तर प्रदेश का पहला बोन-टिश्यू बैंक शुरू हो गया है। यह सुविधा उन मरीजों के लिए बहुत मददगार होगी जिन्हें हड्डी या स्पाइन की गंभीर सर्जरी करानी पड़ती है। अब मरीजों को बोन ग्राफ्ट के लिए बाहर या दूसरे राज्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
इस बैंक में हड्डियों, लिगामेंट और अन्य टिश्यू को वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस किया जाएगा। इन्हें सुरक्षित रखने के लिए -40°C डीप फ्रीजर और -80°C अल्ट्रा-लो टेम्परेचर फ्रीजर का इस्तेमाल किया जा रहा है। इतनी कम तापमान पर रखने से टिश्यू लंबे समय तक सही हालत में रहते हैं और शरीर में डालने पर इनके रिजेक्ट होने का खतरा कम हो जाता है।
KGMU के ऑर्थोपेडिक सर्जरी विभाग के हेड डॉ. आशीष कुमार ने बताया कि इस बैंक से मरीजों को बोन ग्राफ्ट आसानी से मिल सकेंगे, जिससे इलाज का खर्च कम होगा। अक्सर कॉम्प्लेक्स ट्रॉमा सर्जरी या जॉइंट रिप्लेसमेंट में मरीज के शरीर से पर्याप्त हड्डी नहीं मिल पाती, ऐसे में यह बैंक काम आएगा। डॉ. दीपक कुमार ने बताया कि -80°C पर स्टोर की गई हड्डियों में एंटीजेनिसिटी कम हो जाती है, जिससे शरीर इन्हें आसानी से स्वीकार कर लेता है।
यह पूरा सेंटर 1 करोड़ रुपये के बजट से सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में बनाया गया है। यहाँ 18 से 45 साल के उन मरीजों की हड्डियों को सुरक्षित रखा जाएगा जिनका मेडिकल कारणों से अंग विच्छेदन (amputation) हुआ है। हड्डियों को स्टोर करने से पहले उनकी कड़ी जांच की जाती है और 24 घंटे के भीतर उन्हें स्टरलाइज़ कर दिया जाता है ताकि कोई इन्फेक्शन न रहे।
यह सुविधा भारत के ‘ट्रांसप्लांटेशन ऑफ ह्यूमन ऑर्गन्स एंड टिश्यूज़ एक्ट 1994’ के नियमों के तहत चलाई जा रही है। इससे न केवल लखनऊ बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश और आसपास के राज्यों के उन लोगों को फायदा होगा जो एक्सीडेंट, ट्यूमर या इन्फेक्शन की वजह से हड्डी की सर्जरी का इंतजार कर रहे थे।