Kanpur में कोचिंग सेंटरों पर बड़ा एक्शन, काकादेव में 30 से ज्यादा संस्थान सील, 60 को नोटिस
Kanpur: लखनऊ में हुए अग्निकांड के बाद कानपुर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देशों के बाद शहर के सबसे बड़े कोचिंग हब काकादेव में बड़ी कार्रवाई शुरू हुई है। प्रशासन ने सुरक्ष
Kanpur: लखनऊ में हुए अग्निकांड के बाद कानपुर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देशों के बाद शहर के सबसे बड़े कोचिंग हब काकादेव में बड़ी कार्रवाई शुरू हुई है। प्रशासन ने सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने वाले 30 से ज्यादा कोचिंग संस्थानों को सील कर दिया है और 60 से अधिक को नोटिस थमाया है।
यह अभियान 22 जून से 25 जून 2026 तक चला, जिसमें कानपुर विकास प्राधिकरण (KDA), फायर विभाग, पुलिस और बिजली विभाग की टीमों ने मिलकर छापेमारी की। जांच में यह चौंकाने वाली बात सामने आई कि कानपुर के करीब 800 कोचिंग सेंटरों में से सिर्फ 40 के पास ही फायर एनओसी (NOC) है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि बेसमेंट में किसी भी तरह की कोचिंग क्लास नहीं चलेगी, क्योंकि ये जगहें पार्किंग के लिए तय थीं।
इस कार्रवाई की जद में कई बड़े नाम भी आए हैं। 24 जून को काकादेव में 22 कोचिंग सेंटरों समेत 32 व्यावसायिक इमारतों को सील किया गया। इसके अलावा, विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के भाई बिट्टू महाना की जाजमऊ स्थित बिल्डिंग को भी बेसमेंट में अवैध कोचिंग और रेस्टोरेंट चलाने के कारण सील कर दिया गया है। क्षेत्रीय उच्च शिक्षा विभाग ने बिना पंजीकरण के चल रहे 14 सेंटरों को भी नोटिस जारी किया है।
| प्रमुख उल्लंघन और कारण | विवरण |
|---|---|
| फायर सुरक्षा | फायर एनओसी की कमी और इमरजेंसी एग्जिट न होना |
| अवैध निर्माण | पार्किंग वाले बेसमेंट में क्लास चलाना |
| वेंटिलेशन | हवा और रोशनी के उचित इंतजाम न होना |
| रजिस्ट्रेशन | पंजीकरण का नवीनीकरण न कराना |
इस अचानक हुई कार्रवाई से काकादेव इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है। कई कोचिंग संचालकों ने डर के मारे छात्रों को छुट्टी दे दी है या ऑनलाइन क्लास शुरू कर दी हैं, जिससे छात्रों में काफी असमंजस है। हालांकि, कुछ संचालकों का कहना है कि केडीए ने बिना सूचना दिए कार्रवाई की है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि लोगों की जान की सुरक्षा सबसे ऊपर है और नियमों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पूरे उत्तर प्रदेश में अब तक 335 से ज्यादा भवनों को सील किया जा चुका है।