Maharashtra: कल्याण के दुर्गाडी किले में बकरी ईद की नमाज के दौरान मंदिर में प्रवेश पर लगी पाबंदी को लेकर विवाद बढ़ गया। गुरुवार, 28 मई 2026 को शिवसेना के दोनों गुटों और BJP कार्यकर्ताओं ने यहां ‘घंटा नाद’ (घं
Maharashtra: कल्याण के दुर्गाडी किले में बकरी ईद की नमाज के दौरान मंदिर में प्रवेश पर लगी पाबंदी को लेकर विवाद बढ़ गया। गुरुवार, 28 मई 2026 को शिवसेना के दोनों गुटों और BJP कार्यकर्ताओं ने यहां ‘घंटा नाद’ (घंटियां बजाकर विरोध) किया। माहौल को देखते हुए पुलिस ने किले के आसपास भारी सुरक्षा बल और बैरिकेड्स लगाए थे।
विरोध प्रदर्शन में कौन-कौन शामिल रहा और क्या हुआ
इस आंदोलन में एकनाथ शिंदे गुट की ओर से गोपाल लैंडगे, रवि पाटिल और महेश गायकवाड़ ने नेतृत्व किया। वहीं उद्धव ठाकरे गुट (UBT) की तरफ से विजय साल्वी और बाला परब प्रदर्शन में शामिल हुए। पहली बार BJP के कार्यकर्ता भी इस विरोध का हिस्सा बने। पुलिस ने एहतियातन BJP कॉर्पोरेटर महेश पाटिल को उनके घर से ही हिरासत में ले लिया था, क्योंकि उन्होंने प्रशासन को सड़कों पर नमाज और मंदिर में पाबंदी के खिलाफ चेतावनी दी थी।
प्रशासन के नियम और कानूनी विवाद क्या है
जिला प्रशासन हर साल बकरी ईद की नमाज के समय कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए हिंदू भक्तों का दुर्गा मंदिर में प्रवेश अस्थायी रूप से रोकता है। यह नियम काफी पुराना है। वहीं, प्रशासन ने निर्देश दिए हैं कि साल के बाकी दिनों में किले के अंदर किसी भी तरह की इस्लामिक प्रार्थना या पूजा नहीं होगी, सिवाय आधिकारिक तौर पर तय मौकों के। इस किले के मालिकाना हक को लेकर करीब 50 साल से कानूनी लड़ाई चल रही है। दिसंबर 2024 में सिविल कोर्ट ने जमीन महाराष्ट्र सरकार की बताई थी, लेकिन जनवरी 2025 में कोर्ट ने अपील लंबित रहने तक यथास्थिति (status quo) बनाए रखने का आदेश दिया था।
सुरक्षा इंतजाम और बाद का घटनाक्रम
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त संजय जाधव ने पुष्टि की कि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। SRPF की टीमों ने बैरिकेड्स लगाकर लोगों की आवाजाही पर नजर रखी। प्रदर्शनकारी पुलिस बैरिकेड्स पार कर मंदिर तक पहुंचने की कोशिश कर रहे थे, जिन्हें सुरक्षाकर्मियों ने रोका। नमाज खत्म होने के बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों ने नारे लगाए, वहीं हिंदू संगठनों ने किले के पास हनुमान चालीसा का पाठ किया।
Frequently Asked Questions (FAQs)
घंटा नाद आंदोलन क्या है और यह कब शुरू हुआ?
यह एक वार्षिक विरोध प्रदर्शन है जो 1982 या 1986 से शुरू हुआ था। इसकी शुरुआत दिवंगत शिवसेना नेता आनंद दिघे ने की थी।
दुर्गाडी किले को लेकर कानूनी विवाद क्या है?
किले के स्वामित्व को लेकर 50 साल से विवाद है। दिसंबर 2024 में कोर्ट ने इसे महाराष्ट्र सरकार का बताया था, लेकिन जनवरी 2025 में कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है।