Finance : Income Tax Appellate Tribunal (ITAT) की मुंबई बेंच ने टैक्सपेयर्स के हक में एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि अगर किसी व्यक्ति ने नया घर खरीदने के लिए निवेश किया है, तो उसे Section 54 के तहत टैक्स छूट
Finance : Income Tax Appellate Tribunal (ITAT) की मुंबई बेंच ने टैक्सपेयर्स के हक में एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि अगर किसी व्यक्ति ने नया घर खरीदने के लिए निवेश किया है, तो उसे Section 54 के तहत टैक्स छूट से वंचित नहीं किया जा सकता, भले ही उसने शुरू में अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल न किया हो। यह राहत उन लोगों के लिए बड़ी खबर है जो री-असेसमेंट की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं।
Section 54 के तहत टैक्स छूट का क्या नियम है?
Income Tax Act के Section 54 के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति अपना पुराना रिहायशी मकान बेचकर उससे मिले पैसे को एक तय समय के भीतर दूसरे रिहायशी मकान में निवेश करता है, तो उसे लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स पर टैक्स में छूट मिलती है। इस मामले में टैक्सपेयर M Sheikh ने इसी छूट का दावा किया था। ITAT ने साफ किया कि टैक्स लाभ पाने के लिए यह जरूरी नहीं है कि रिटर्न तय तारीख तक ही भरा गया हो।
री-असेसमेंट के दौरान दावा क्यों मान्य हुआ?
अक्सर यह माना जाता था कि री-असेसमेंट की कार्यवाही केवल छूटी हुई कमाई की जांच के लिए होती है, नए दावे करने के लिए नहीं। लेकिन ITAT ने स्पष्ट किया कि:
- कैपिटल गेन वह मुख्य कमाई थी जिसकी जांच री-असेसमेंट में हो रही थी।
- Section 54 का दावा सीधे तौर पर इसी कमाई की गणना से जुड़ा था।
- इसलिए इसे कोई नया या अलग दावा नहीं माना जा सकता और इसे स्वीकार करना होगा।
आम आदमी पर इस फैसले का क्या असर होगा?
टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह फैसला उन लोगों के लिए मददगार है जिनसे कागजी कार्रवाई या प्रक्रिया में गलती हुई है। अब केवल रिटर्न फाइल न करने जैसी तकनीकी वजहों से किसी व्यक्ति को उसके जायज टैक्स लाभ से नहीं रोका जाएगा। अगर दावा सही है और निवेश के सबूत मौजूद हैं, तो री-असेसमेंट के दौरान भी उसका फायदा मिल सकता है।