Delhi: इटली के रक्षा मंत्री Guido Crosetto अपनी पहली भारत यात्रा पर आए हैं। उन्होंने गुरुवार, 30 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली के National War Memorial पर जाकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी और गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण किया। इसके ब
Delhi: इटली के रक्षा मंत्री Guido Crosetto अपनी पहली भारत यात्रा पर आए हैं। उन्होंने गुरुवार, 30 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली के National War Memorial पर जाकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी और गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने Manekshaw Centre में भारत के रक्षा मंत्री Rajnath Singh के साथ द्विपक्षीय बैठक की ताकि दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों को और मजबूत किया जा सके।
भारत और इटली की बैठक में किन बातों पर हुई चर्चा
रक्षा मंत्रालय (MoD) के मुताबिक, दोनों मंत्रियों ने रक्षा सहयोग के अलग-अलग मुद्दों पर बात की। उन्होंने दुनिया के बदलते हालात और सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर अपने विचार साझा किए। इस बातचीत का मुख्य मकसद औद्योगिक साझेदारी को बढ़ाना और नए क्षेत्रों में मिलकर काम करना था।
रक्षा संबंधों में अब तक क्या बदलाव आए हैं
भारत और इटली के बीच रक्षा संबंध अक्टूबर 2023 में राजनाथ सिंह की रोम यात्रा के बाद काफी तेज हुए थे। जनवरी 2026 में India-EU Defence & Strategic Partnership पर हस्ताक्षर होने से इस सहयोग को और ताकत मिली है। अब दोनों देश केवल हथियारों के व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ट्रेनिंग, जानकारी साझा करने, नौसेना अभ्यास और समुद्री सुरक्षा जैसे कई क्षेत्रों में साथ काम कर रहे हैं।
NSA अजीत डोभाल के साथ क्या हुई बातचीत
रक्षा मंत्री Crosetto ने 29 अप्रैल 2026 को भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) Ajit Doval से भी मुलाकात की। इस मुलाकात में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता, समुद्र में नेविगेशन की आजादी और व्यापार व ऊर्जा मार्गों की सुरक्षा जैसे गंभीर विषयों पर चर्चा हुई।
Frequently Asked Questions (FAQs)
इटली के रक्षा मंत्री ने भारत में किन लोगों से मुलाकात की
इटली के रक्षा मंत्री Guido Crosetto ने भारत के रक्षा मंत्री Rajnath Singh और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) Ajit Doval के साथ महत्वपूर्ण बैठकें कीं।
भारत और इटली के बीच रक्षा सहयोग किन क्षेत्रों में बढ़ रहा है
दोनों देश अब सैन्य शिक्षा, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D), समुद्री जागरूकता, हथियारों के निर्यात और संयुक्त उद्यमों (Joint Ventures) के जरिए रक्षा उत्पादन में सहयोग कर रहे हैं।