Iran और US के बीच बढ़ी तनातनी, बातचीत की शर्तों पर अड़ा ईरान; हवाई हमलों से मचा हड़कंप

World: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका के साथ बातचीत तभी करेगा जब उसे युद्ध के मैदान में पर्याप्त सैन्य और रणनीतिक बढ़त हासिल होगी। इस बीच दोनों देशों के ब

World: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका के साथ बातचीत तभी करेगा जब उसे युद्ध के मैदान में पर्याप्त सैन्य और रणनीतिक बढ़त हासिल होगी। इस बीच दोनों देशों के बीच हुए पिछले समझौते का टूटना और हवाई हमलों का सिलसिला शुरू होना पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन गया है।

ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा कि सैन्य घटनाक्रम और युद्ध की कुल लागत यह तय करेगी कि तेहरान आगे क्या कदम उठाता है। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर सफलता की संभावना 10 प्रतिशत भी हो, तब भी बातचीत का रास्ता खुला रहना चाहिए क्योंकि युद्ध की तुलना में बातचीत का खर्च कम होता है। वहीं ईरान के संसद स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf का मानना है कि सैन्य तैयारी और बातचीत दोनों साथ-साथ चल सकते हैं।

तनाव इतना बढ़ गया है कि जून 2026 में पाकिस्तान के जरिए हुआ ‘इस्लामाबाद समझौता’ (MoU) अब पूरी तरह खत्म हो गया है। ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने इस समझौते की शर्तों को तोड़ा है, इसलिए ईरान ने भी अपनी प्रतिबद्धताएं रोक दी हैं।

मौजूदा हालात काफी गंभीर हैं क्योंकि US Central Command ने ईरान के मिलिट्री कमांड सेंटर, एयर डिफेंस और मिसाइल लॉन्च साइटों पर लगातार नौ रातों तक हवाई हमले किए हैं। जवाब में ईरान ने भी ड्रोन और मिसाइल हमलों का सहारा लिया है, जिसमें बहरीन और कुवैत जैसे देशों के खिलाफ कार्रवाई के दावे किए गए हैं।

दूसरी तरफ अमेरिका का कहना है कि वह बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन सैन्य दबाव भी जारी रहेगा। अमेरिकी एनर्जी सेक्रेटरी Wright ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति Donald Trump के लक्ष्य जब तक पूरे नहीं होते, तब तक सैन्य ऑपरेशन चलते रहेंगे। अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना और क्षेत्रीय खतरों को कम करना है।