Iran ने फ्रांस और पश्चिमी देशों को घेरा, मानवाधिकारों पर कहा- बंद करें दुनिया को लेक्चर देना
World: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने फ्रांस और उसके पश्चिमी सहयोगियों पर मानवाधिकारों के नाम पर दोहरा चेहरा रखने का आरोप लगाया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए इन देशों की आलोचना की और कह
World: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने फ्रांस और उसके पश्चिमी सहयोगियों पर मानवाधिकारों के नाम पर दोहरा चेहरा रखने का आरोप लगाया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए इन देशों की आलोचना की और कहा कि ये देश दुनिया को मानवाधिकारों पर ज्ञान देना बंद करें।
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब फ्रांस और यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास समेत करीब 25 से 32 देशों ने एक साझा बयान जारी किया। इन देशों ने ईरान में प्रदर्शनकारियों को दी जा रही मौत की सजा की कड़ी निंदा की और तेहरान से मांग की कि वह तुरंत फांसी देना बंद करे और मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करे। पश्चिमी देशों ने ईरान के लोगों को अभिव्यक्ति की आजादी और शांतिपूर्ण सभा के अधिकार का सम्मान करने की बात कही थी।
फ्रांस और उसके सहयोगियों के इस बयान पर पलटवार करते हुए अब्बास अराघची ने कहा कि गाजा में इजरायल द्वारा किए जा रहे नरसंहार और ईरान के खिलाफ आक्रामकता का समर्थन करके इन देशों ने अपनी नैतिक साख खो दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब ये देश इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों का साथ दे रहे हैं, तो उनका मानवाधिकारों का दावा पूरी तरह खोखला है।
यह तनाव ऐसे समय में आया है जब ईरान और यूरोपीय देशों के बीच संबंध पहले से ही खराब हैं। इस विवाद के पीछे केवल मानवाधिकार नहीं, बल्कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही और अमेरिका के साथ तनाव भी है। अमेरिका का आरोप है कि ईरान ने जलमार्ग खोलने के समझौते का पालन नहीं किया, जबकि ईरान का कहना है कि अमेरिका ने उसकी जमी हुई संपत्ति वापस नहीं की और नाकाबंदी नहीं हटाई।
इतना ही नहीं, इस तनाव के बीच गाजा में अक्टूबर 2023 से चल रहे युद्ध में अब तक 73,388 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। साथ ही जून 2025 और फरवरी से अप्रैल 2026 के बीच इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर सैन्य हमले भी किए थे, जिससे दोनों पक्षों के बीच कड़वाहट और बढ़ गई है।