Maharashtra: ठाणे के वागले एस्टेट इलाके में पिछले दो दिनों से दहशत का माहौल था, जहां एक घायल तेंदुआ रिहायशी इलाके में घुस आया था। वन विभाग की टीम ने रविवार दोपहर को करीब 21 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद इस तेंदुए को सुरक्षि
Maharashtra: ठाणे के वागले एस्टेट इलाके में पिछले दो दिनों से दहशत का माहौल था, जहां एक घायल तेंदुआ रिहायशी इलाके में घुस आया था। वन विभाग की टीम ने रविवार दोपहर को करीब 21 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद इस तेंदुए को सुरक्षित बचा लिया है। यह तेंदुआ संजय गांधी नेशनल पार्क (SGNP) के बफर जोन के इंदिरा नगर इलाके में देखा गया था।
कैसे हुआ रेस्क्यू और तेंदुए की हालत क्या है
वन विभाग को शनिवार, 30 मई को तेंदुए की जानकारी मिली थी। शाम को ऑपरेशन शुरू हुआ लेकिन अंधेरा होने की वजह से इसे आधी रात को रोकना पड़ा। रविवार सुबह 6 बजे फिर से तलाश शुरू हुई और दोपहर तक तेंदुए को पकड़ लिया गया। SGNP की वेटेरिनरी ऑफिसर Dr. Vinaya Jangle ने डार्ट गन से तेंदुए को बेहोश किया, जिसके बाद उसे सुरक्षित पकड़ा गया।
तेंदुए की उम्र करीब 4 से 5 साल बताई जा रही है। जांच में पाया गया कि उसके चारों पंजों में चोटें थीं और पीछे की टांग पर गहरा घाव था, जहां कुछ जगहों पर हड्डियां तक दिख रही थीं। वन अधिकारियों का मानना है कि यह चोटें किसी दूसरे जंगली जानवर से लड़ाई के दौरान लगी होंगी।
कौन-कौन सी टीमें रहीं शामिल और अब आगे क्या होगा
इस पूरे ऑपरेशन में SGNP रेस्क्यू टीम, ठाणे टेरिटोरियल विंग और RAWW व WWA जैसे संगठनों के वॉलंटियर्स ने मिलकर काम किया। इसमें डायरेक्टर Anita Patil, डिप्टी डायरेक्टर Pradip Patil और अन्य वन रेंजर्स की मुख्य भूमिका रही। मौके पर प्राथमिक इलाज के बाद तेंदुए को बोरिवली स्थित SGNP लेपर्ड रेस्क्यू सेंटर भेज दिया गया है, जहां डॉक्टर उसकी सेहत की पूरी जांच कर रहे हैं।
वन विभाग ने पहले ही इलाके के लोगों को सलाह दी थी कि वे सुबह और शाम के समय अकेले बाहर न निकलें। अधिकारियों ने बताया कि ऐसे मामलों में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस धारा 144 लागू कर सकती है। साथ ही लोगों से अपील की गई कि वे खुद जाल न बिछाएं और केवल ट्रेंड एक्सपर्ट्स का इंतजार करें।
Frequently Asked Questions (FAQs)
तेंदुआ ठाणे के किस इलाके से पकड़ा गया है
तेंदुए को ठाणे के वागले एस्टेट स्थित इंदिरा नगर इलाके से पकड़ा गया, जो संजय गांधी नेशनल पार्क (SGNP) के बफर जोन और येऊर रेंज के मामा भांजा हिल्स के अंतर्गत आता है।
तेंदुए को चोटें कैसे लगीं
वन अधिकारियों के मुताबिक तेंदुए के चारों पंजों और शरीर पर गहरे घाव थे। आशंका है कि ये चोटें किसी अन्य जंगली जानवर के साथ हुई लड़ाई के कारण लगी हैं।