Indonesia में शक्तिशाली भूकंप से भारी तबाही, 51 लोगों की मौत और हजारों बेघर
World : इंडोनेशिया के पूर्वी हिस्से में शनिवार सुबह आए 7.7 तीव्रता के जोरदार भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक कम से कम 51 लोगों की जान जा चुकी है और दर्जनों लोग घायल हैं। भूकंप इतना शक्तिशाली था क
World : इंडोनेशिया के पूर्वी हिस्से में शनिवार सुबह आए 7.7 तीव्रता के जोरदार भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक कम से कम 51 लोगों की जान जा चुकी है और दर्जनों लोग घायल हैं। भूकंप इतना शक्तिशाली था कि कई इलाके पूरी तरह मलबे में तब्दील हो गए और लोगों में दहशत का माहौल है।
यह भूकंप शनिवार, 15 अगस्त 2026 को सुबह करीब 5 बजे के आसपास आया। इंडोनेशिया की मौसम विज्ञान एजेंसी BMKG ने बताया कि मुख्य झटके के बाद इलाके में 235 से 341 तक आफ्टरशॉक्स महसूस किए गए, जिनमें से सबसे बड़ा झटका 6.2 तीव्रता का था। शुरुआती तौर पर सुनामी की चेतावनी जारी की गई थी, लेकिन बाद में इसे हटा लिया गया क्योंकि समुद्र के स्तर में कोई बड़ा खतरा नहीं देखा गया। हालांकि, कुछ तटीय इलाकों जैसे रिउंग में 1.61 मीटर तक की छोटी लहरें दर्ज की गईं।
नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट एजेंसी (BNPB) के प्रमुख सुहार्यांतो ने बताया कि भूकंप ने कई घरों को पूरी तरह से गिरा दिया है और अभी भी कई लोग मलबे के नीचे दबे हो सकते हैं। डिप्टी हेल्थ मिनिस्टर बेंजामिन पॉलस ऑक्टावियानस ने मौतों के आंकड़ों की पुष्टि की है। वहीं, ईस्ट नुसा Tenggara के पुलिस चीफ रुडी डार्मको के मुताबिक, बिजली गुल होने और इमारतों के गिरने से बचाव कार्य में काफी दिक्कतें आ रही हैं।
प्रभावित इलाकों की स्थिति काफी गंभीर है, जिसे नीचे दी गई टेबल में समझा जा सकता है:
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| कुल मौतें | कम से कम 51 |
| गंभीर रूप से घायल | 36 लोग |
| मामूली रूप से घायल | 77 लोग |
| निकाले गए लोग | करीब 5,000 |
| गिरे हुए घर | 157 घर पूरी तरह तबाह |
| क्षतिग्रस्त घर | करीब 200 |
बचाव दल मलबे में फंसे लोगों को निकालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन भूस्खलन और सड़कों के टूटने की वजह से नागेकेओ जैसे इलाकों तक पहुँचना मुश्किल हो गया है। वहां सड़क मार्ग बंद होने के कारण टीम अब फेरी के जरिए पहुँचने की कोशिश कर रही है। सिक्का के डिप्टी रीजेंट साइमन सुबंडी ने बताया कि लोग इतने डरे हुए हैं कि वे घरों के अंदर जाने की हिम्मत नहीं कर पा रहे हैं और बाहर टेंट लगाकर या बरामदे में सो रहे हैं।