मुंबई और चेन्नई समेत कई भारतीय शहरों के नाम बदले, जानिए क्या है इसके पीछे की वजह और पूरा प्रोसेस
India: देश के कई शहरों के नाम समय-समय पर बदले गए हैं। कुछ शहरों के नाम औपनिवेशिक प्रभाव यानी अंग्रेजी राज की यादों को मिटाने के लिए बदले गए, तो कुछ के नाम स्थानीय संस्कृति और पुरानी पहचान को वापस लाने के लिए बदले गए। इसम
India: देश के कई शहरों के नाम समय-समय पर बदले गए हैं। कुछ शहरों के नाम औपनिवेशिक प्रभाव यानी अंग्रेजी राज की यादों को मिटाने के लिए बदले गए, तो कुछ के नाम स्थानीय संस्कृति और पुरानी पहचान को वापस लाने के लिए बदले गए। इसमें मुंबई और चेन्नई जैसे बड़े शहरों के नाम बदलने की प्रक्रिया काफी चर्चित रही है।
महाराष्ट्र सरकार ने 4 मार्च 1995 को ‘बॉम्बे’ का नाम बदलकर ‘मुंबई’ किया था, जिसे केंद्र सरकार ने नवंबर 1995 में मान्यता दी। यह बदलाव मराठा विरासत को सम्मान देने के लिए किया गया था। मुंबई नाम यहाँ के मूल निवासी कोली समुदाय की देवी मुंबादेवी के नाम पर रखा गया है। इसी तरह, तमिलनाडु सरकार ने 17 जुलाई 1996 को ‘मद्रास’ का नाम बदलकर ‘चेन्नई’ कर दिया। यह कदम तमिल पहचान को मजबूत करने के लिए उठाया गया था। चेन्नई नाम ‘चेन्नपट्टिनम’ से आया है, जिसका संबंध स्थानीय शासक के पिता चेन्नप्पा नायका से माना जाता है।
शहरों के नाम बदलने की एक तय सरकारी प्रक्रिया होती है। सबसे पहले राज्य विधानसभा का कोई सदस्य (MLA) नाम बदलने का प्रस्ताव लाता है। इस पर चर्चा और वोटिंग होती है और बहुमत मिलने के बाद इसे केंद्र के गृह मंत्रालय (MHA) को भेजा जाता है। गृह मंत्रालय रेलवे, डाक विभाग और सर्वे ऑफ इंडिया से ‘अनापत्ति प्रमाण पत्र’ (NOC) लेता है ताकि यह पक्का हो सके कि उस नाम का कोई दूसरा शहर तो नहीं है। मंजूरी मिलने के बाद राज्य सरकार गजट में नोटिफिकेशन जारी करती है और नाम आधिकारिक तौर पर बदल जाता है।
हाल के समय में भी महाराष्ट्र में औरंगाबाद का नाम बदलकर ‘छत्रपति संभाजीनगर’ और उस्मानबाद का नाम बदलकर ‘धाराशिव’ किया गया है। वहीं केरल विधानसभा ने राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव पास किया है, जिस पर अभी मंजूरी का इंतजार है।