रूस में नौकरी का बड़ा मौका, भारतीय कुशल मजदूरों के लिए खुले रास्ते; लाखों लोगों को मिल सकता है रोजगार
Delhi: भारत और रूस ने मिलकर निर्माण क्षेत्र (Construction Sector) में काम करने वाले कुशल मजदूरों के लिए एक बड़ा समझौता किया है। रूस के नेशनल एसोसिएशन ऑफ बिल्डर्स (NOSTROY) के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली का दौर
Delhi: भारत और रूस ने मिलकर निर्माण क्षेत्र (Construction Sector) में काम करने वाले कुशल मजदूरों के लिए एक बड़ा समझौता किया है। रूस के नेशनल एसोसिएशन ऑफ बिल्डर्स (NOSTROY) के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली का दौरा किया, जहां भारतीय मंत्रालयों के साथ बातचीत हुई। इस पहल से भारत के युवाओं और कुशल कामगारों के लिए रूस में नौकरी के नए और सुरक्षित अवसर खुलेंगे।
यह पूरा मामला दिसंबर 2025 में भारत और रूस के बीच हुए लेबर मोबिलिटी एग्रीमेंट का हिस्सा है। इस समझौते का मकसद भारतीय मजदूरों को कानूनी तरीके से रूस भेजना है ताकि उन्हें वहां काम करने में कोई परेशानी न हो। रूस में इस समय निर्माण क्षेत्र में मजदूरों की भारी कमी है। रूसी श्रम मंत्रालय के मुताबिक, 2030 तक वहां करीब 8 लाख अतिरिक्त निर्माण श्रमिकों की जरूरत होगी।
इस योजना के तहत उम्मीदवारों की पहचान की जाएगी और उनकी स्किल का टेस्ट लिया जाएगा। इसके बाद उन्हें ट्रेनिंग और सर्टिफिकेट दिया जाएगा ताकि वे रूस के कंस्ट्रक्शन स्टैंडर्ड्स के हिसाब से काम कर सकें। MAX Tech International के मैनेजिंग डायरेक्टर मंजुनाथ गणेशन ने बताया कि इस कदम से रोजगार के बहुत सारे मौके पैदा होंगे। वहीं, Sberbank के डिप्टी चेयरमैन अनातोली पोपोव ने कहा कि भारतीय मजदूरों की दुनिया भर में काफी इज्जत है और यह प्रोजेक्ट भविष्य में बहुत सफल होगा।
रूस में भारतीयों के लिए रोजगार की स्थिति को इन आंकड़ों से समझा जा सकता है:
| विवरण | आंकड़े/जानकारी | |
|---|---|---|
| 2025 के अंत तक रूस में कार्यरत भारतीय | 70,000 से 80,000 | |
| 2026 में अपेक्षित नए भारतीय श्रमिक | कम से कम 40,000 | |
| कुल संभावित विशेषज्ञ (वर्ष के अंत तक) | 10 लाख तक | |
| 2030 तक रूस की कुल श्रम कमी | 31 लाख श्रमिक |
दिल्ली में हुए इस दौरे के दौरान ‘Make India Technical and Training Center’ में वर्कफोर्स मोबिलिटी फ्रेमवर्क का प्रदर्शन भी किया गया, जिसे अधिकारियों ने पसंद किया। इसके अलावा, दोनों देश ड्रोन (Unmanned Aircraft Systems) के क्षेत्र में भी तकनीक और ट्रेनिंग को लेकर सहयोग करने पर विचार कर रहे हैं।